सेहतमंद शरीर के लिए विटामिन्स की जरूरत होती है. विटामिन ई भी एक काफी सहरें अद्वितीय गुणों से भरपूर है. इसकी कमी से शरीर में कई और दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं. गर्भवती महिलाओं की खुराक में विटामिन ई की कमी से बच्चों में मानसिक कौशल संबंधी विकार व उपापचय में समस्या की संभावनाएं पैदा हो सकती हैं. विटामिन ई झुर्रियों को रोकने में विटामिन ई लाभकारी है. विटामिन ई की कमी से इन भ्रूण में चोलीन और ग्लूकोज की कमी रह जाती है और विकास सही तरीके से नहीं हो पाता.

गर्भवती औरतों के लिए विटामिन ई की खुराक सीखने का कौशल बढ़ाने में मददगार है. एक शोध में पाया गया कि जन्म के बाद इस विटामिन की कमी को पूरा करने से बेहतर है कि बच्चे जब गर्भ में हो तब पूरा किया जाए. जन्म के बाद विटामिन ई की उचित मात्रा देने के बाद भी मछलियां (जिनपर शोध किया गया) सीखने में असफल रहीं. इनमें दिमाग का गठन तो हुआ, लेकिन ये सीखने में सफल नहीं रहीं और सही तरह से प्रतिक्रिया नहीं दे सकीं.

विटामिन ई के फाएदे
1-प्रीमेच्योर या नवजात शिशु को विटामिन ई की कमी से एनीमिया जैसी ही कई बीमारियां हो सकती हैं. विटामिन ई इन सबसे बच्चे की रक्षा करता है.

2-विटामिन ई की कमी से शरीर में कई रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है. जैसे- नपुंसकता, बांझपन, आंतों में घाव, गंजापन, गठिया, पीलिया, मधुमेह, हृदय रोग.
3-विटामिन ई खून में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है.
4-शरीर में अनेक अंगों को सामान्य रूप में बनाये रखने में विटामिन ई ही मदद करता है. जैसे- मांसपेशियां और अन्य टिश्यू.
5-हार्मोंस संतुलन के लिए विटामिन ई का महत्वपूर्ण योगदान है.
6-शरीर के फैटी एसिड को संतुलन करने का काम विटामिन ई का है.
7-शरीर में विटामिन ई की कमी हो जाने से किसी भी रोग का संक्रमण जल्दी लग जाता है.
8-विटामिन ई की कमी से मानसिक समस्याएं भी हो सकती है.
9-विटामिन ई की कमी से थायराइड ग्लैण्ड तथा पिट्यूटरी ग्लैण्ड की कार्यशैली में बाधा उत्पन्न हो जाती है-

इनमें भरपूर होता है विटामिन ई
विटामिन ई वनस्पति तेल, गेहूं, हरे साग, चना, जौ, खजूर, मांढ के चावल, मक्खन, मलाई, शकरगन्द, अंकुरित अनाज और फलों में पाया जाता है.