इस हफ़्ते रिलीज़ हुई फ़िल्म को हॉलीवुड की सबसे डरावनी फ़िल्मों में से एक माना जा रहा है. ये फ़िल्म कितनी डरावनी है, इस बात का अंदाज़ा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड ने इसे बिना कुछ कट्स लगाए रिलीज़ सर्टिफ़िकेट देने से इंकार कर दिया था.

प्रसिद्ध हॉरर लेखक स्टीफ़न किंग के उपन्यास 'इट' पर आधारित इस फ़िल्म की कहानी एक काल्पनिक शहर डेर्री में मौजूद एक खूंखार दरिंदे के बारे में है. एक जोकर की वेशभूषा में नज़र आने वाला 'इट' इस शहर के बच्चों के पीछे पड़ा है और बच्चों का पसंदीदा जोकर, कितना डरावना हो सकता है, इस फ़िल्म से आपको मालूम चलता है.

दरअसल 'पेनीवाइज़ क्लाउन' की कहानी काफी पुरानी है और स्टीफन किंग के इस किरदार पर पहले एक टीवी मिनीसीरीज़ भी बन चुकी है. भारत में भी ज़ी टीवी पर 'वोह' नाम से आनेवाला धारावाहिक एक हत्यारे क्लाउन या जोकर की कहानी के बारे में था.

इस फ़िल्म की कहानी की शुरुआत डेर्री नामक शहर से होती है जहां एक सात साल के बच्चे को एक भुतहा जोकर किडनैप करता है और फिर उसे खा लेता है. इस शहर में ये पहली घटना नहीं होती है और फिर शहर में मौजूद बच्चों को आभास होने लगता है कि कुछ है जो उन्हें अपना शिकार बनाना चाहता है, यही 'इट' है. इट से लड़ने के लिए वो किसी बड़े की मदद नहीं ले सकते क्योंकि बड़ों को बच्चों की समस्या दिख ही नहीं रही है, ऐसे में डरे हुए बच्चों का समूह कैसे इस भूत से लड़ता है, ये रोंगटे खड़ा कर देने वाला अनुभव है

'इट' के भूत की खासियत यह है कि उसके द्वारा बनाई गई चीज़ें सिर्फ़ बच्चों को दिखती हैं और बड़े इन्हें देख या महसूस नहीं कर पाते. इस पूरे कॉन्सेप्ट के चलते बच्चों को जोकरों को लेकर मन में एक डर बैठ गया था और शायद यही वजह थी की अमेरिका की एक जोकर एसोसिएशन ने इस फिल्म का विरोध करते हुए, इसके प्रदर्शन को रोके जाने की मांग की थी. भारत में भी इस फिल्म को एडल्ट सर्टिफिकेट दिया गया है साथ ही, कमज़ोर दिल वाले लोगों को इस फिल्म को देखने की सलाह दी जा रही है.

लेकिन इस फिल्म से जुड़े असल विवाद की वजह है इस फिल्म की कास्ट और मूल किताब. दरअसल 80 के दशक में लिखी गई इस मूल किताब में कई जगह बच्चों को एक दूसरे से शारीरिक रुप से आकर्षित दिखाया गया है. इसके अलावा फिल्म में कुछ ऐसे दृश्य भी हैं जहां एक पिता अपनी बेटी को बुरी तरह पीटता है और गाली देता है. किसी भी समाज की समझ में इस तरह के मुद्दे थोड़े संवेदनशील हो जाते हैं और ऐसे में इस फिल्म को बिना अभिभावको के देखना बच्चों के लिए हानिकारक हो सकता है.

बतौर फ़िल्म निर्देशक एंडी मुशिएती ने अच्छा काम किया है और वो फिल्म में डर को सही समय पर लाने में कामयाब होते दिखते हैं. बच्चों के चेहरे पर डर के भाव आपको डरा देने के लिए काफी है और निर्देशक ने मंझे हुए बाल कलाकारों से काम करवाया है.

 

फिल्म के कुछ शॉट्स आपको भारतीय फिल्मों से प्रेरित लग सकते हैं लेकिन फिल्म का पार्श्व संगीत इस फ़िल्म के हॉरर में जान डाल देता है. भारत में रिलीज़ हुई फिल्म में से सभी आपत्तिजनक दृश्यों को हटाया गया है लेकिन इसके बाद भी हमारी सलाह यही है कि आप इस फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद ही इसे देखने जाएं, तो बेहतर.