बीते शुक्रवार, 8 सितंबर को गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल के बाथरूम में एक 7 साल के मासूम की हत्या कर दी गई. इसके ठीक दो दिनों बाद शाहदरा के एक स्कूल में पांच वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार हुआ. हत्या के आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं. जांच चल रही है. हालांकि कितनी ही निष्पक्ष जांच अब इन डरावने तथ्यों को नहीं बदल सकती.

दिन-ब-दिन बढ़ रही ऐसी घटनाओं के साथ ही पेरेंट्स के दिल में भी डर गहरा गया है. क्या वे ‘जान की कीमत’ पर अपने बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं! 

पेरेंट्स के खौफ को दूर करने के लिए  कुछ तरीके साझा कर रहा है, जिन्हें ध्यान में रखकर स्कूल जा रहे बच्चों की सुरक्षा काफी हद तक सुनिश्चित की जा सकती है.

*बच्चा अगर केजी या प्लेस्कूल में जा रहा है तो ध्यान दें कि उसे अपना पूरा नाम, आपका नाम, घर का पता और कम से कम दो फोन नंबर जरूर याद रहें. ये नंबर आपके अलावा किसी ऐसे करीबी के हों जो किसी भी अनजान नंबर से फोन आने पर उसे डिसकनेक्ट न करे.

*सावधानी बतौर कई पेरेंट्स बच्चे के कपड़ों या बैगपैक पर उसका नाम या पता लगा देते हैं. ऐसा करने से बचें क्योंकि इससे किसी भी अनजान व्यक्ति को आपके बच्चे की डिटेल्स पता चल जाती हैं. ऐसे में नाम लेकर छोटे बच्चे को बहकाना बहुत आसान हो जाता है.

*अगर बच्चा बस से स्कूल जाता है तो बस में सेफ्टी के बारे में तसल्ली कर लें. बस के ड्राइवर, कंडक्टर, गार्ड का पुलिस वैरिफिकेशन है या नहीं, ये जरूर चेक करें. अगर आपके बच्चे का स्टॉप सबसे आखिर में आता है तो देखें कि उसके साथ कोई लेडी टीचर या लेडी सिक्योरिटी गार्ड भी है या नहीं.

*स्कूल में एडमिशन से पहले ही पता कर लें कि स्कूल मैनेजमेंट ने पास्ट इमरजेंसी से कैसे डील किया था. अगर ऐसे मामले नजर आते हैं जिसमें स्कूल का एक्शन ढीला-ढाला रहा तो ऐसे स्कूल में बच्चे को पढ़ाने से बचें. मैनेजमेंट से सीधी बात भी की जा सकती है.

*आप अपने बच्चे के साथ घर पर ‘सिचुएशन रोल प्ले’ कर सकते हैं. यानी स्कूल में किसी खास हालात में अगर बच्चा फंस जाए तो उसे क्या करना चाहिए. इसमें स्कूल बस छूट जाने से लेकर स्कूल में अकेले छूट जाने जैसी सिचुएशन भी रखें. बच्चे को हल भी सुझाएं.

*आजकल मार्केट में प्रिप्रोग्राम्ड सेलफोन भी हैं. इनमें कुछ इमरजेंसी नंबर आ जाते हैं. स्कूल की इजाजत से ऐसा फोन बच्चे को दिया जा सकता है ताकि किसी इमरजेंसी सिचुएशन में वो तुरंत कॉल कर सके.

*बच्चे को गुड और बैड टच के बारे में तफसील से समझाएं. इसमें झिझक की कोई बात नहीं है, बल्कि ये बच्चे की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी कदमों में से एक है. उसके भीतर विश्वास भरें कि आप हर हाल में उसके साथ हैं ताकि वो खुलकर अपनी बात आपसे शेयर कर सके.

*बच्चे आपस में भी बुलीइंग का शिकार होते हैं. जैसे बड़े बच्चे किसी बात को लेकर छोटी क्लास के बच्चों को तंग करते हैं. कई बार ये तंग करना बच्चों को शारीरिक या भावनात्मक नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए इस बात का भी ध्यान रखें.

*बच्चे की हर एक्टिविटी पर नजर रखना उसकी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. अगर बच्चे की सामान्य आदत जैसे खाने-पढ़ने-खेलने-बोलने में कोई भी बदलाव नजर आ रहा है तो उससे शांति से बात करें. हो सकता है कि उसे स्कूल में कोई परेशानी आ रही हो.

*बच्चे को समझाएं कि स्कूल से छूटने के वक्त वो बस के अपनी साथियों के साथ ही रहे. छुट्टी के समय कभी भी बच्चा अकेला बाथरूम या कॉमन रूम में न जाए.

*पेरेंट्स-टीचर-मीट कभी भी मिस न करें, इस दौरान कई चीजें सामने आती हैं. दूसरे पेरेंट्स से भी मिलने का मौका मिलता है. उनके फोन नंबर लिए जा सकते हैं. बच्चे के क्लास टीचर और प्रिसिंपल का भी नंबर रखें ताकि किसी इमरजेंसी में संपर्क किया जा सके.

*सबसे जरूरी बात ये कि बच्चे के सामने कभी भी अपनी घबराहट न जाहिर करें. बच्चे को आश्वस्त रखें कि वो स्कूल कुछ सीखने जा रहा है और ये सारी एक्टिविटीज सिर्फ किसी इमरजेंसी के लिए हैं.