स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने और किसानों के कर्ज माफी की मांग को लेकर महापड़ाव के 11वें दिन किसान सभा की ओर से किया गया चक्का जाम पूर्णतया सफल रहा.

सोमवार को सीकर जिले में करीब 150 स्थानों पर चक्का जाम किया गया, जिससे लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. किसानों के इस चक्का जाम का आलम ये था कि गांव की सड़कों के अलावा सीकर से गुजरने वाले सभी हाइवे पर भी सन्नाटा पसरा रहा.

चक्का जाम के बाद दोपहर को जिला कलेक्टर द्वारा किसान सभा को जयपुर में मंत्री समूह से वार्ता करने का प्रस्ताव भेजा गया, जिस पर चर्चा करके पूर्व विधायक और महापड़ाव की अगुवाई कर रहे कामरेड अमराराम ने जयपुर जाकर मंत्री समूह से वार्ता करने से इंकार कर दिया.

इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर मंत्री समूह को सोमवार को ही चर्चा करनी है तो वे सीकर आ जाएं बाद में किसान सभा और मंत्री समूह के बीच मंगलवार को वार्ता होने पर सहमति बनी. अब किसान सभा के 11 सदस्यों के प्रतिनिधी मंडल के साथ चार मंत्रियों का समूह किसानों की मांगों को लेकर वार्ता करेगा.

वहीं किसान नेता और पूर्व विधायक अमराराम ने साफ कर दिया कि अगर सरकार ने उनकी स्वामीनाथन आयोग की शिफारिशों सहित किसानों के कर्ज माफी की मांग नहीं मानी तो उनका महापड़ाव जारी रहेगा. यही नहीं सोमवार के चक्का जाम के बाद किसान नेता अमराराम ने मंगलवार को पूरे राजस्थान में चक्का जाम का आह्वान किया है.

वहीं इस मामले पर अब राजनीतिक रंग भी चढ़ने लगा लगा. सीकर में जहां राजपा प्रमुख डॉ. किरोड़ीलाल मीणा और निर्दयलीय विधायक हनुमान बेनीवाल किसानों आंदोलन के समर्थन में पहुंचे हैं, वहीं कांग्रेस भी राजनीति करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है.

राजस्व मंत्री अमराराम चौधरी ने कहा की मैं खुद भी किसान हूं, हमारी सरकार ने जितना काम किसानों के लिए किया है किसी पूर्ववर्ती सरकार ने नहीं किया है. सालभर बाद प्रदेश में चुनाव आ रहे हैं इसलिए अन्य दलों को किसानों की याद आई है. हर क्षेत्र में हमारी सरकार ने किसानों को राहत पहुंचने की कोशिश की है. विपक्षी दल किसानों को अपने राजनीतिक लाभ के लिए भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं.

वही मंत्री यूनुस खान ने बताया की सरकार की मंत्रिमंडलीय उपसमिति किसानों के साथ वार्ता करेगी. किसानों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है. हर समस्या का समाधान वार्ता से ही निकाला जा सकता है.