मध्यप्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं और बीजेपी चौथी बार सरकार बनाने की तैयारी में है. इसलिए सीएम शिवराज सिंह का अब पूरा ध्यान गुड गवर्नेंस पर है.

सीएम शिवराज सिंह चौहान अब हर जिले में अपना एक जासूस तैनात करने जा रहे हैं जो सीएम सचिवालय को डायरेक्ट फीड बैक देंगे. ये युवा आईआईटी, एनआईटी, टीआईएस जैसे संस्थानों से चुने गए हैं जो जमीनी हकीकत से सीएम को सीधे रुबरू कराएंगे.

दरअसल, मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान जानना चाहते हैं कि उनकी सरकार की योजनाएं जनता तक किस रुप में पहुंच रहीं हैं और इसका कितना लाभ लोगों को मिल रहा है. इसके लिए सीएम शिवराज सिंह ने आईआईटी, एनआईटी, लॉ ग्रेजुएट्स, टीआईएस जैसे बड़े संस्थानों से पास आउट और डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम कर रहे युवाओं की एक टीम तैयार की है जो प्रदेश के जिलों में तैनात रहकर सीएम सचिवालय को डायरेक्ट फीडबैक देगी.

इस कवायद का मकसद प्रदेश में बीजेपी की चौथी बार सरकार बनाने की राह आसान करना है सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में 51 रिसर्च एसोसिएट्स की नियुक्ति की है. जिन्हें सीएम फेलो नाम दिया है.

15 दिन की ट्रेनिंग के बाद 18 सितम्बर को इन्हें आवंटित जिलों में रिपोर्ट करना होगा. फेलो हर महीने सीएम सचिवालय को रिपोर्ट देंगे कि सरकार की योजनाओं की हकीकत क्या है और सरकारी अधिकारी किस तरह जनता के हित में काम कर रहे हैं.

चीफ मिनिस्टर यंग प्रोफशनल्स फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत एक साल के लिए इनकी नियुक्ति की गई है और इनका साल भर का पैकेज साढ़े पांच लाख से ज्यादा का है.
सीएम शिवराज सिंह ने खुद इन फेलोज से बात की है और कहा है कि मुझे मध्यप्रदेश को जहां ले जाना था वहां हम पहुंच गए, लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कामकाज से वो कतई संतुष्ट नहीं है. दोनों क्षेत्रों में बहुत ज्यादा काम करने की जरूरत है. इसलिए जिलों में जाकर वे सरकार के कामकाज का मूल्यांकन करें और अपनी रिपोर्ट सीधे सीएम सचिवालय को दें और सीएम की योजनाओं के साथ-साथ प्रधानमंत्री की योजनाओं का भी मूल्यांकन करें. वे खुले मन से सरकार को नये सुझाव और विचार बे-झिझक रुप से दें.

सीएम ने सरकार के 18 विभागों पर जोर दिया है जिनके कामकाज पर कृषि, ग्रामीण विकास, आदिवासी विकास, उद्योग और वाणिज्य, राजस्व, स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास, स्वास्थ्य,महिला एवं बाल विकास, ऊर्जा,गृह, पीडब्ल्यूडी, पीएचई, नगरीय प्रशासन, पर्यावरण, वन, परिवहन, जल संरक्षण जैसे विभाग शामिल हैं.

मध्यप्रदेश से पहले पहले गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली समेत केंद्र सरकार ने भी ये सिस्टम लागू किया है जिसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं. क्योंकि सरकार में बैठे अधिकारी जो रिपोर्ट देते हैं उसमें ऐसा लगता है कि सबकुछ बढ़िया चल रहा है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अलग रहती है.