दो साध्वियों से रेप के जुर्म में 20 साल की सजा भुगत रहा गुरमीत राम रहीम किसी क्रूर तानाशाह की तरह डेरे में अपनी ‘सल्तनत’ चलाता था. गुरमीत ने खुद की हिफाजत के लिए ‘कुर्बानी दल’ बना रखा था. इसके अलावा उसने ‘विषकन्याओं का दल’ भी बना रखा था जिसका कनेक्शन गुफा स्थित उसके शयन कक्ष से जुड़ा था. गुफा में ऐशो-आराम का हर सामान होने का खुलासा पहले ही हो चुका है.

गुरमीत राम रहीम के डेरे में अनुयायी के तौर पर 6 साल गुजार चुके गुरदास सिंह तूड ने विषकन्याओँ को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उनका दावा है कि वो आधा दर्जन से अधिक विषकन्याओं के बारे में खुद जानते हैं जिनमें कम से कम तीन अब भी डेरे में मौजूद हैं. गुरदास सिंह के मुताबिक सुदेश नाम की एक महिला का जिक्र सीबीआई की चार्जशीट में भी है.

गुरदास सिंह ने बताया कि विषकन्याओं के इस दल में वो महिलाएं शामिल थीं जो खुद कभी ना कभी गुरमीत की गुफा के जाल में फंस चुकी थीं. उम्रदराज होने के बाद उन्हें गुरमीत की हर सुख सुविधा का ध्यान रखने के काम पर लगा दिया जाता था. विषकन्याओं के दल में उन्हीं महिलाओं को शामिल किया जाता था जिन पर गुरमीत को पूरा भरोसा होता था. ये गुरमीत के कपड़ों का ध्यान रखने से लेकर सुंदर साध्वियों को चुन कर गुफा में भेजने का काम भी करती थी.

गुरदास सिंह के मुताबिक विषकन्याएं सुंदर साध्वियों को चुनने के बाद दूसरी साध्वियों से अलग कर देती थीं. इन सुंदर साध्वियों को ऐसे कमरे में रखा जाता था जिसका रास्ता सीधा गुफा से जुड़ा था. रात के वक्त तीन से चार सुंदर साध्वियों को गुफा के बाहर पहरा देने के लिए रखा जाता था. इन्हीं में से किसी एक को विषकन्याएं गुफा के अंदर गुरमीत के पास पहुंचा देती थीं. उससे यही कहा जाता था कि ‘पिताजी’ ने उसे बुलावा भेजा है.

विषकन्याओं के जिम्मे डेरे में एक और काम भी था और वो था- सभी साध्वियों को डरा धमका कर काबू में रखना. गुरदास सिंह ने बताया कि अगर किसी साध्वी के मुंह से गलती से भी डेरे या गुरमीत के खिलाफ कोई शब्द निकल जाता तो उसे ऐसी यातना दी जाती थी कि जिसे वो कभी ना भूल सके. साध्वियों को आपस में बात करने की भी इजाजत नहीं दी जाती थी.

‘पहली गलती’ पर सजा के तौर पर पूरे 24 घंटे पानी के अलावा कुछ भी खाने को नहीं दिया जाता था. अगर कोई साध्वी ‘दोबारा गलती’ करती तो उसे टार्चर रूम में ले जाकर जमकर पीटा जाता. सीबीआई की चार्ज शीट में एक पीड़िता ने सजा के तौर पर भूखा-प्यासा रखने का जिक्र किया है.

बताया गया है कि विषकन्याएं जिन साध्वियों को गुफा में तैनाती के लायक नहीं समझती थीं, उनसे दिन रात डेरे में खाना बनाने, साफ सफाई, मंच की साज सज्जा समेत तमाम काम कराए जाते थे. वहीं सुंदर और पढ़ी-लिखी लड़कियों को गुफा की ‘सेवा’ के अलावा स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी जाती थी. गुरमीत के जेल जाने के बाद एक ऐसी पीड़ित महिला का वीडियो सामने आया है जिसमें उसने डेरे में दिन-रात काम करवाने की बात कही है.

हैरानी की बात ये है कि सीबीआई की चार्जशीट में जिक्र होने के बाद भी इन विषकन्याओं के खिलाफ ना तो अब तक कोई केस दर्ज हुआ है और ना ही उनकी धरपकड़ के लिए कोई कोशिश. ये जानते हुए भी कि ये विषकन्याएं गुरमीत के गुनाहों में भागीदार रही है. गुरमीत का असली सच सामने आने के बाद ही इन विषकन्याओं की हकीकत से पर्दा हटा है.