छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में महुआ के पेड़ के नीचे जुड़वा बच्चों को जन्म देने वाली महिला पर पेड़ के कथित मालिक ने जुर्माना लगाया है. जुर्माने के तौर पर महिला को पांच बोतल शराब व देशी मुर्गा देना होगा.

दरअसल, दंतेवाड़ा के किरंदुल अस्पताल से एक गर्भवती को बिना एम्बुलेंस दिए ही लौटा दिया गया था. इसके बाद गर्भवती महिला ने जंगल में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था. इस दौरान प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को राहगीरों की मदद से एक महुए के पेड़ के नीचे रखा गया था, जहां उसने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया.

जिस महुए के पेड़ के नीचे महिला ने बच्चों को जन्म दिया, उसके मालिक ने परम्पराओं का हवाला देते हुए पांच बोतल शराब और दो देशी मुर्गे दंड के रूप में देने की मांग की है.

घटना 9 सितंबर की है. दंतेवाड़ा के परलाकट्टा निवासी कमलू की गर्भवती पत्नी मासे को 'किरंदुल एनएमडीसी प्रोजेक्ट हॉस्पिटल' ले जाया गया था. लेकिन डॉक्टरों ने महिला को  15 दिन बाद आने की बात कहकर लौटा दिया था. अस्पताल से पैदल लौटते समय महिला को किरंदुल बस्ती के नारियां पारा में प्रसव पीड़ा होने लगी.

दो घंटे दर्द से तड़पती महिला ने मजबूरन महुआ के पेड़ के नीचे जुड़वा बच्चों को जन्म दिया. इसके बाद राहगीरों ने उसे किरंदुल अस्पताल में भर्ती करवाया. इस वक्त महिला खून की कमी से जूझ रही है. राहत की बात है कि महिला और उसके बच्चे दोनों स्वस्थ हैं.

इधर बस्तर में आदिवासियों की परम्परा और संस्कृति का हवाला देते हुए घटना के तीन दिन बाद गांववालों को जब पता चला कि मां और बच्चे दोनों स्वास्थ हैं, इस पर जश्न के लिए इंतजाम करने का फरमान जारी किया गया.

गांव के वरिष्ठ लोगों का कहना है कि हमारे क्षेत्र की मिट्टी में स्वस्थ और जुड़वां बच्चों को महिला ने जन्म दिया है, इसलिए दो देशी मुर्गे और पांच बोतल शराब का प्रबंध परिजनों को करना पड़ेगा.

इस खुशी के मौके पर महिला के पति कमलू ने भी फरमान मान लिया है. कमलू ने बताया कि महूआ के पेड़ के मालिक व गांववालों की मांग वह जल्द ही पूरा कर देगा. कमलू ने कहा कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद वह आदिवासी परंपरा के अनुसार ग्रामीणों के फरमान का पालन करेगा.