सरकारी थर्मल पावर प्लांटों पर "कोयले की मार"
भोपाल। प्रदेश के सभी सरकारी थर्मल पावर प्लांट इन दिनों "कोयले की मार" से जूझ रहे हैं। पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक नहीं होने के चलते विद्युत इकाईयों को उनकी क्षमता के अनुरूप कम लोड पर चलाया जा रहा है। अगर समय रहते कोयले की इस ज्वलंत समस्या से निजात नहीं मिली तो फिर सरकारी थर्मल पावर प्लांट को बंद करना पड़ेगा, जिससे प्रदेश में बिजली संकट गहरा सकता है।
 प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकारी थर्मल पावर प्लांट से बिजली का उत्पादन करने में कंपनी प्रबंधन को इन दिनों पसीने छूट रहे हैं ।क्योंकि चारों थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक ना के बराबर है, वो तो भला हो लगातार तीन दिनों की बारिश के चलते दो हाईडल प्लांट इंदिरा सागर और ओमकारेश्वर चालू हो गए हैं। जिसमें इंदिरा सागर से 950 मेगावाट तथा ओमकारेश्वर से 400 मेगावाट बिजली तैयार हो पा रही है। जो प्रदेश 7000 मेगावाट की डिमांड को पूरा करने में इस समय अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। बताया जा रहा है कि सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट सारणी में 25,500 मीट्रिक टन कोयला शेष बचा है, जो केवल प्लांट की खपत के अनुसार 2 दिनों का है। जबकि कोल इंडिया की डब्ल्यूसीएल कंपनी से प्रतिमाह सारणी पावर प्लांट को 2 लाख मीट्रिक टन तथा एसीसीएल से डेढ़ लाख मीट्रिक टन कोयला देने का एग्रीमेंट है। परंतु कोल इंडिया कि यह दोनों कंपनियां मध्यप्रदेश को कम कोयला देते हुए दूसरे अन्य राज्यों को कोयला बेच रही है। यही स्थिति संजय गांधी थर्मल पावर प्लांट बीरसिंहपुर की है, यहां पर भी खपत के अनुसार केवल देढ़ दिनों का कोयला शेष बचा है, अर्थात 19000 मीट्रिक टन। अगर हम श्रीसिंगाजी थर्मल पावर प्लांट खंडवा की बात करें तो यहां पर जरुर 70000 मीट्रिक टन तथा अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचार्ई में 48000 मीट्रिक टन कोयला स्टॉक है। मंगलवार शाम 5 बजे की यह स्थिति थी कि बिरसिंहपुर पावर प्लांट की चारों इकाईयां 150-150 मेगावाट पर चल रही थी तथा 500 मेगावाट वाली एक बड़ी इकाई हाइड्रोजन लीकेज के कारण बंद थी। वहीं खंडवा पावर प्लांट की एक इकाई से 350 मेगावाट, सारणी पावर प्लांट की 7 और 8 नंबर विद्युत इकाई से 150-150 व 10 नंबर इकाई से 200 मेगावाट तथा चचाई पावर प्लांट की एक इकाई जरूर फूल लोड पर चल रही है। इस इकाई से 250 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। बिजली कंपनी के उच्चाधिकारियों ने पावर प्लांटों की स्थिति सुधारने के लिए समय रहते अगर कोई उचित निर्णय नहीं लिया तो जरुर प्रदेश में बिजली संकट गहरा सकता है।
 
बैंस की चुप्पी समझ से परे
 सरकार के तेज तर्रार आईएएस अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा इकबाल सिंह बैंस की चुप्पी इतने गंभीर समय में समझ से परे है। बिजली उत्पादन कंपनी के पावर प्लांटों की स्थिति इस समय वेंटिलेटर पर होने जैसी है, इसके बावजूद बैंस का इस समय रुचि नहीं लेना कुछ गले से नीचे नहीं उतर रहा है। जबकि यह वही आईएएस इकबाल सिंह बैंस है जो अपने अधीनस्थ विभागों में कमियों को कोसों दूर रखते हैं। फिर ना जाने ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आने वाली बिजली कंपनियों की खामिया उन्हें क्यो नहीं दिखाई दे रही हैं ? खैर जो भी हो बैंस की चुप्पी इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। 
 
प्लांटों में कोयले की स्थिति पर एक नजर
 प्लांट  स्टाक कोयला  कितने दिन का शेष
 सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट सारणी  25 हजार 5 सौ टन  2 दिन 
संजय गांधी थर्मल पावर प्लांट बिरसिंहपुर 19 हजार टन देढ़ दिन
 अमरकंटक पावर प्लांट चचाई  43 हजार टन  15 दिन
 श्रीसिंगाजी पावर प्लांट खंडवा  70 हजार टन  10 दिन
-------------------------------------------------------

(नोट :- उक्त आंकड़े मंगलवार शाम के है।)