अनियमित वित्तीय कंपनी और पुलिस विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न
रायपुर।
पुलिस महानिदेशक ए.एन. उपाध्याय ने आज सिविल लाइन्स स्थित सभागार में 'अनियमित वित्तीय कंपनी और पुलिसÓ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया।
 इस कार्यशाला में प्रदेश के सभी जिलों से आये पुलिस अधिकारियों और लोक अभियोजकों को सम्बोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक ने कहा कि अनियमित वित्तीय कंपनियों के कार्य आरंभ करते ही पुलिस उनकी केस स्टडी कर ले तो वह कंपनी अपना कारोबार प्रारंभ नहीं कर सकती। पुलिस की जानकारी के बगैर उस क्षेत्र में कोई कोई अनियमित वित्तीय कारोबार संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में कोई भी अनियमित वित्तीय कंपनी पंजीकृत नहीं है।

पुलिस को यह जानना जरूरी है कि कोई नई कंपनी अपना कारोबार प्रारंभ कर रही है, वह कौन से कार्य के लिये पंजीकृत है, और कैसे वित्तीय कार्य प्रारंभ कर रही है। पुलिस महानिदेशक ने यह भी कहा कि यदि कोई कंपनी अथवा संस्था बैंक से अधिक ब्याज देने अथवा कम समय में धन दोगुना करने का प्रलोभन देती है तो प्रथम दृष्टि में ही यह स्पष्ट है कि यह कंपनी धोखा देना चाहती है। इस प्रकार अनियमित कारोबार बहुत बड़े अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि कोई ग्रामीण या सेवानिवृत अधिकारी-कर्मचारी झांसे में आकर अपनी जीवन भर की कमाई गवां बैठते हैं और उनका पूरा परिवार इस सदमें से टूट जाता है।

अत: इस प्रकार का अनियमित कारोबार करने वाली कंपनियों को रोकने और उनके विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही करने के लिये पुलिस को संभव कानूनी कार्यवाही करनी चाहिये। पुलिस महानिदेशक श्री उपाध्याय ने इन कंपनियों के विरूद्ध आम नागरिकों के बीच जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिए। उन्होंने इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन राज्य अन्य भागों में आयोजित करने के निर्देश दिए। पुलिस महानिदेशक ने इस अवसर पर पुलिस मुख्यालय के अपराध अनुसंधान विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तिका का विमोचन भी किया।
इस कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध अनुसंधान विभाग) आर.के. विज ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अनियमित वित्तीय कंपनियों का कारोबार छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में हो रहा है। इन्हें रोकने के लिये किये जाने वाले कानूनी प्रावधानों पर आयोजित यह कार्यशाला बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग को ग्रामीण इलाकों में अपनी गुप्त सूचना तंत्र को और अधिक मजबूत करने पर बल दिया और कहा कि  इस प्रकार की कंपनियोंं को प्रारंभ होने से पूर्व ही रोका जा सके तो और बेहतर परिणाम आएंगे। श्री विज ने कहा कि पुलिस को यह भी पता लगाना चाहिए कि इन कंपनियों का संचालक कौन है। श्री विज ने कहा कि इन अनियमित कंपनियों के विरूद्ध कार्यवाही में पुलिस की विवेचना अतिमहत्वपूर्ण है। पुलिस को इन कंपनियों के  विरूद्ध कार्यवाही से बैंकों का सहयोग लेकर यह पता लगाना चाहिये कि कंपनी ने कितना धन संग्रह किया और इस धन का निवेश देश के किस स्थानों पर किया गया, जिससे उन परिसंपत्तियों को राजसात करने में बहुत आसानी होगी।
इस कार्यशाला में रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक प्रदीप गुप्ता ने रायपुर रेंज में अनियमित वित्तीय कंपनियों के विरूद्ध कार्रवाई के बारे में विस्तृत रूप में बताया। पुलिस मुख्यालय अपराध अनुसंधान विभाग के पुलिस महानिरीक्षक श्री हेमकृष्ण राठौर ने मुख्यालय स्तर पर इन अनियमित वितिय कंपनियों के विरूद्ध की गई कार्यवाही और संख्यात्मक विवरण प्रस्तुत किया।

इस कार्यशाला में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के उप महाप्रबंधक नीलभ झा, सेबी के सहायक महाप्रबंधक विनोद शर्मा, सी.ए. संघ के अध्यक्ष अमित चिमनानी, प्रवर्तन निदेशालय के उपनिदेशक शैलेन्द्र सिंह ने अनियमित वित्तीय कंपनियों के विरूद्ध की जाने वाली कार्यवाही के बारे में बताया और पुलिस अधिकारियों तथा लोक अभियोजक के द्वारा पूछे गये प्रश्नों का समाधान किया।

कार्यशाला का आयोजन पुलिस मुख्यालय के अपराध अनुसंधान शाखा द्वारा किया गया। इस अवसर पर सहायक पुलिस महानिरीक्षक सुशील चंद्र द्विवेदी, गिरिजा शंकर जायसवाल सहित प्रदेश के सभी जिलों से आए पुलिस अधिकारी और लोक अभियोजन अधिकारी उपस्थित थे। इस कार्यशाला का संचालन पुलिस अधीक्षक एम.एन. पाण्डेय ने किया।