पुनिया की मॅराथन बैठकों से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की अंदरूनी नाराजगी झलकी
जोगी के अलग होने के बावजूद प्रदेश संगठन में गुटबाजी हावी
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में प्रदेश कांग्रेस संगठन में चल रही गतिविधियां व प्रदेश में कांग्रेस की अब तक की स्थिति का आंकलन रिपोर्ट लेकर दिल्ली पहुंच चुके प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया जल्द ही इस रिपोर्ट को राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं उपाध्यक्ष राहुल गांधी को सौपेेंगे। रिपोर्ट सौपने के बाद आला कमान से दिए जाने वाले दिशा-निर्देशों को लेकर श्री पुनिया एक बार फिर छग दौरे पर आएंगे और यहां कांग्रेस संगठन को उन निर्देशों का पालन करने के निर्देश दे सकते है।प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया चार दिवसीय छग दौरे पर आए हुए थे। अपने दौरे के दौरान उन्होंने यहां लगातार विधायकों व पदाधिकारियों के साथ बैठक भी की। श्री पुनिया ने जितनी बैठकें की उनमें से ज्यादातर बैठकों में प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल एवं नेताप्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव मौजूद रहे, लेकिन कुछ बैठकों में प्रदेश अध्यक्ष श्री बघेल शामिल नहीं हुए। इन बैठकों में खासकर राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाऊस में हुई विधायक दल की बैठक में श्री बघेल अनपुस्थित रहे।

श्री बघेल के इस बैठक में शामिल नहीं होना विधायकों से लेकर पार्टी के अन्य नेताओं में उस दिन काफी चर्चा का विषय बना रहा। कई लोग तो यह भी चर्चा करते दिखे कि इस बैठक में श्री बघेल को शामिल होने के लिए कहा ही नहीं गया था।  गौरतलब हो कि श्री बघेल के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए प्रदेश में कांग्रेस विधानसभा, लोकसभा से लेकर नगरीय निकायों के चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा। ऐसी स्थिति में प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के मन में शायद यही चल रहा है कि आगामी चुनाव नये प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में लडऩा उचित होगा। लेकिन संगठन के फैसले के खिलाफ वे कोई भी बयानबाजी करने से बचना चाहते है। यहीं नहीं कई नेता प्रदेश अध्यक्ष श्री बघेल की कार्यशैली से भी नाराज चल रहे है।

यह नाराजगी धीरे-धीरे गुटबाजी का भी रंग लेने लगा है। ज्ञात हो कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कांग्रेस में रहते प्रदेश संगठन में श्री बघेल और श्री जोगी के बीच खुलकर गुटबाजी देखी जा रही थी। श्री जोगी को पार्टी से हटे आज लंबा समय बीत गया है लेकिन श्री जोगी के हटने के बाद भी संगठन में कई नेताओं की अंदरूनी नाराजगी के चलते गुटबाजी का असर अभी भी कहीं ना कहीं झलक पड़ता है। नाराजगी व गुटबाजी का असर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कई बड़े कार्यक्रमों में कई वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति से आसानी से देखा जा सकता है।