मध्य प्रदेश पुलिस के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है, जब पुलिस मुख्यालय कमजोर मुखबिर तंत्र को मजबूत करने के लिए हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है. मुख्यालय की स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो एमपी ई कॉप मोबाइल एप के साथ सिटीजन पोर्टल के जरिए ऑनलाइन मुखबिर तंत्र तैयार कर रहा है.

बीते तीन महीने के अंदर पांच हजार से ज्यादा ऑनलाइन मुखबिर बनाए गए हैं. इन सभी मुखबिरों का पूरा रिकॉर्ड इंटेलिजेंस ब्रांच के पास है. एमपी ई कॉप पर आम नागरिकों से जुड़ी तमाम सेवाएं हैं, लेकिन पुलिस हेतु सूचना का ऑप्शन इंटेलिजेंस के लिए कुछ खास है.

एमपी पुलिस के एप को डालनलोड करने के लिए उससे जुड़ने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी रहता है. लेकिन एप पर ऑनलाइन मुखबिर तंत्र को तैयार करने के लिए खासतौर पर पुलिस हेतु सूचना ऑप्शन दिया गया है. इस ऑप्शन के लिए किसी भी तरह का रजिस्ट्रेशन करना जरूरी नहीं है. इस पर पुलिस हेतु सूचना ऑप्शन पर जाते ही सूचना से जुड़ी तमाम जानकारी भर सबमिट ऑप्शन पर क्लिक कर ऑनलाइन मुखबिर बन सकते हैं.

पुलिस मुख्यालय ऑनलाइन मुखबिर बनाए गए शख्स की जानकारी गोपनीय रखता है. इंटेलिजेंस उन मुखबिरों से लगातार संपर्क में रहता है, जिनकी सूचनाएं और जानकारी सबसे ज्यादा काम में आती है.