नगर परिषदों में नियुक्त किए सहायक लेखाधिकारी 
भोपाल। शिवराज सरकार में वैसे तो कई आईएएस अधिकारी है जो सरकार की योजनाओं का सफल क्रियान्वयन करने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन सरकार के एक युवा आईएएस अपने ठोस निर्णय को लेकर हमेशा से ही चर्चा में रहते हैं। उनके सामने सरकार के कई बड़े अफसर सहित मंत्रियों को कई बार औंधे मुंह की खाना पड़ा है। जिसके पीछे की मुख्य वजह है उनकी ईमानदारी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का उन पर अटूट भरोसा, वह आईएएस अधिकारी है विवेक अग्रवाल। जो वर्तमान में मुख्यमंत्री की टीम में सचिव और नगरी प्रशासन एवं विकास विभाग में बतौर आयुक्त के पद पर पदस्थ है।
बताया जा रहा है कि नगरी प्रशासन में यांत्रिकीय सेवा, स्वास्थ्य सेवा जैसे एक और नगरीय वित्त सेवा का गठन किया गया है।जिसका बकायदा इसी चालू वित्त वर्ष- 2017 में एक नियम बनाकर इसे स्वीकृत किया है। जिसके बाद से प्रदेश की सभी नगर परिषदों में अब सहायक लेखाधिकारी नियुक्त होंगे। जिनकी पदस्थापना के आदेश भी कल देर शाम को जारी कर दिए है । इतना बड़ा और ठोस निर्णय लेना विवेक अग्रवाल जैसे आईएएस अधिकारी के लिए ही संभव हो सकता है। उनके सामने वैसे तो कई परेशानियां आई है लेकिन नगर परिषदों में सबसे ज्यादा परेशानी लेखा शाखा की है। जिसके लिए नेता से लेकर अधिकारी तक अपनी मनमानी कर पसंद का लेखापाल बैठाते हैं ताकि उनके द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन आसानी से हो सके या फिर सरल भाषा में यह कहे कि उनकी फाइल लेखा शाखा में चंद मिनट रुक कर सीधे सीएमओ के पास पहुंच जाए। इस बड़ी समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए आयुक्त विवेक अग्रवाल ने पहले तो इसका नियम बनाया फिर बाद में इसे अमलीजामा पहनाते हुए पूरी तरह से अस्तित्व में लाकर पारित कर दिया अर्थात नगरी प्रशासन एवं विकास विभाग की अन्य सेवा की तरह नगरीय वित्त सेवा बनाकर इसमें सहायक लेखा अधिकारी की नियुक्ति कर दी। प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड से चयनित अभ्यार्थियों को इसमें सहायक लेखाधिकारी बनाकर आगामी आदेश तक अस्थाई रूप से 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि के लिए पदस्थ कर दिया है। ऐसे कुल 54 नगरपालिका परिषदों में नियुक्ति की गई है।
 
इस आदेश का भी पालन कराएं आयुक्त
अक्सर यह देखा जाता है कि कोई भी विभाग आदेश तो जारी कर देता है,लेकिन उसका पालन कितने लोगों ने किया है इसकी बाद में समीक्षा नहीं करता। ऐसे ऐसा ही एक आदेश मई - 2017 में आयुक्त नगरी प्रशासन एवं विकास ने निकाला था। जिसमें स्पष्ट उल्लेख किया था कि प्रदेश की जिन-जिन नगर निगम,  नगर पालिका तथा नगर पंचायतों से अधिकारी और कर्मचारियों के तबादले हुए हैं उन्हें तत्काल रिलीव किया जाए । लेकिन आज भी लंबा समय बीत जाने के बाद भी कई सीएमओ ने इसका पालन करने की जहमत तक नहीं उठाई है।इसलिए आयुक्त विवेक अग्रवाल को इस दिशा में भी ध्यान देने की आवश्यकता है। 
 
सीएमओ ने रातोंरात बदला लेखापाल
 भला ऐसी भी क्या जल्दी थी कि प्रभारी सीएमओ बनने के बाद रातोंरात लेखापाल सहित अन्य अधिकारियों को बदलने की जरूरत पड़ गई। आइए इस पूरे प्रकरण से आपको अवगत कराते हैं , दरअसल बात कुछ इस प्रकार है कि नर्मदापुरम संभाग की सबसे बड़ी नगर पालिका परिषद सारणी में बने शौचालयों की जांच के दौरान कलेक्टर बैतूल शशांक मिश्र ने इस काम का भुगतान रोकने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद शौचालय बनाने वाले ठेकेदारों में आधे से ज्यादा भाजपा नेता होने के कारण एक बार फिर भुगतान करने का जिन्न अपनी बोतल से बाहर निकल आया और बैतूल जिले के दमखम रखने वाले भाजपा विधायक ने कलेक्टर से  इसका भुगतान करने की बात कही। तभी आनन-फानन में डिप्टी डायरेक्टर नर्मदापुरम संभाग सुरेश बेलिया ने बैतूल नगर पालिका सीएमओ अशोक कुमार शुक्ला को सारणी नगर पालिका का प्रभारी सीएमओ बनाने के आदेश जारी कर दिए। जिसके बात प्रभारी सीएमओ ने भी बिना समय गवाए अपनी टीम बैठाकर करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए के बिल पास करने के काम में जुट गए ।
सूत्रों का कहना है कि बैतूल कलेक्टर ने 80 प्रतिशत भुगतान करने के संबंध में प्रभारी सीएमओ को दिशा- निर्देश दे दिए हैं। लेकिन इस पूरे मामले की जानकारी राजधानी में पहुंचने के बाद से जहां भाजपा पार्टी के नेताओं का असली चेहरा सामने आया है, वही जिलों में किस तरह से नगरपालिकाओं में मनमानी चल रही है उसका सबसे अच्छा उदाहरण है।