कलाकार   : कंगना रनौत, सोहम शाह
निर्देशक    : हंसल मेहता
मूवी टाइप : Comedy
अवधि       : 2 घंटा 4 मिनट
 
सिमरन की कहानी: प्रफुल पटेल (कंगना) एक 30 साल की तलाकशुदा महिला है और जॉर्जा में अपनी मिडिल क्‍लास फैमिली के साथ रहती है। पेशे से हाउसकीपर प्रफुल क्राइम की दुनिया के लिए उस वक्‍त तैयार हो जाती है जब उसका वास्‍ता लॉस वेगस स्‍थ‍ित एक कसीनो में गैम्‍बल‍िंग से पड़ता है। सिर्फ एक गलत कदम से आगे कई चीजें गलत हो जाती हैं और जब तक आप इस बारे में जानते हैं, प्रफुल एक बड़ी गड़बड़ में फंस चुकी होती है।

रिव्‍यू: सिमरन की खास और अच्‍छी बात यह है कि फ‍िल्‍म उस पार्ट से कनेक्‍ट करती है जहां बॉलिवुड हिरोइन बदमाश होने के लिए अपना कोई बचाव नहीं करती है। निडर होकर वह अपनी शर्तों पर जीती है और उसी से प्‍यार करती है। वह ब‍िना प्रोटेक्‍शन के सेक्‍स से इनकार कर देती है और लगातार नए-नए अडवेंचर करती है। वह क्राइम की दुनिया में जा रही है, इस पर वह दो बार सोचती तक नहीं। जैसा है, सही है।

लोकेशन के अलावा फिल्म में सब बिखरा-बिखरा सा है। कहानी कई जगह टूटती सी लगती है। जिस तरह प्रफुल बैंक लूटती है और छूट जाती है वह भी हर जगह अपने फिंगर प्रिंट और लिप्स्टिक से लिखे नोट छोड़ने के बाद, उसपर विश्वास करना नामुमकिन है। मीडिया उसे 'लिपस्टिक लूटेरा' नाम देती है और अटलांटा की पुलिस बैंक के पीड़ित कर्मचारी जैसे पूरी फिल्म में जोकर की तरह नज़र आते हैं, जो चुपचाप उन्हें देखते रहते हैं और वह करीब आधे दर्जन लूट को अंजाम दे देती है। ऐसा लग रहा है जैसे हंसल मेहता ने फालतू कॉमिडी फिल्म बनाई है। इसमें बुरा तो कुछ भी नहीं लेकिन लेकिन अगर सब्जेक्ट जो कि असली कहानी है, इसे लाइटली ट्रीट किया भी गया है तो ऑडियंस को और हंसाने की कोशिश करनी चाहिए थी।

फ‍िल्‍म का सबसे अच्‍छा पार्ट कंगना ही हैं। भले वह व‍िनम्र या साहसी हों, पर्दे पर उनका महत्‍व द‍िखता है। हालांक‍ि, कई मौकों पर कंगना का फोकस फ‍िसलता द‍िखता है, लेक‍िन क्‍या इसके ल‍िए उन्‍हें ज‍िम्‍मेदार मानना चाह‍िए? शायद फ‍िल्‍ममेकर के पास कोई दूसरा ऐसा स्‍टार भी नहीं है। फिल्म में स‍िमरन के पैरंट्स, उसके मंगेतर समीर (सोहम) और बाकी देसी-व‍िदेशी कलाकारों ने बहुत ज्‍यादा कमाल नहीं क‍िया है।

सच कहें, तो आप 'सिमरन' को लेकर भावुक नहीं हो पाएंगे चाहे जितनी कोशिश कर लें। लेकिन जब आप फिल्म देखेंगे तो कहीं-कहीं उसकी फीलिंग्स को महसूस ज़रूर करेंगे और वह भी कंगना की अदाकारी की वजह से। उनकी तारीफ़ तो बनती है।