उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की फसल ऋण मोचन योजना मजाक बनकर रह गई है। मथुरा के गोवर्धन में एक किसान का एक पैसा माफ हुआ है। जबकि किसान का कहना है कि उसके पास करीब डेढ़ लाख रुपये का कर्ज है। 
बता दें कि उत्तर प्रदेश फसल ऋण मोचन योजना के अंतर्गत मथुरा में सोमवार को करीब साढ़े पांच हजार किसानों को ऋण माफी के प्रमाण पत्र ‌दिए गए। मथुरा की गोवर्धन तहसील में 1000 किसानों को लोन माफी के प्रमाण पत्र मिले। 

इसी क्रम में गोवर्धन तहसील के गांव अड़ीग निवासी छिद्दी पुत्र डाल चंद को एक पैसे की ऋण माफी का प्रमाण पत्र दिया गया। वहीं ‌‌छिद्दी का कहना है कि उसने करीब डेढ़ लाख रुपये का कर्ज बैंक से लिया था। सरकार ने एक पैसे की माफी करके उसके साथ मजाक किया है। प्रमाण पत्र देखकर किसान के होश उड़ गए। 

अधिकारियों ने बरती लापरवाही

बता दें कि मथुरा में कुल एक लाख आठ हजार किसानों को ऋण मोचन योजना से लाभान्वित किया जाना है। प्रथम चरण में सभी औपचारिकताएं पूरी करने वाले लगभग 15 हजार किसानों का चयन किया गया है, जिन्हें अलग-अलग समारोह में ऋण मोचन सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं। 

इन पात्र किसानों का चयन बैंक अफसर, तहसील प्रशासन, कृषि विभाग आदि द्वारा किया गया है। लेकिन फिर भी ऐसे किसानों का चयन हो गया है जिनके खाते में मात्र एक रुपया है या फिर नाम मात्र के पैसे ही बकाया चले आ रहे है। बड़ा सवाल ये है कि कृषि विभाग, तहसील प्रशासन के सत्यापन में आखिर ये बात क्यों पकड़ में नहीं आई।  

इधर गांव नगला संजा के किसान गजेंद्र सिंह, पूरन सिंह ने बताया कि जिन किसानों ने अपना ऋण अदा कर दिया उन्हें योजना में शामिल करने का औचित्य ही समझ से परे है। 

बैंककर्मी बोले कंप्यूटर की गलती

मामले में भारतीय स्टेट बैंक के समन्वयक नरेश शर्मा ने बताया कि ये वो किसान हैं जिन्होंने अपना ऋण वापस कर दिया था। लेकिन खाते में कुछ नाममात्र की धनराशि बकाया रह गई। इसके चलते खाता पूर्ण नहीं हो सका। कंप्यूटराइज्ड सिस्टम के चलते वह योजना में शामिल हो गए। 

जिला कृषि अधिकारी प्रमोद कुमार ने कहा कि सॉफ्टवेयर के चलते इस प्रकार के किसानों का चयन हो गया है। लेकिन अब ऐसे किसानों को प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं। ऋण अदायगी के साथ ही किसानों को पुन: ऋण मिलना शुरू हो गया है।