मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों को मंत्रियों के समान वेतन भत्ते और बंगले की सुविधाएं दिए जाने के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि जिन पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगले की सुविधा दी जा रही है उनके पास पहले से कोई निजी आवास है या नहीं? हाईकोर्ट ने सरकार से 4 हफ्ते में ये जानकारी मांगी है.

बता दें कि रौनक यादव नाम के एक लॉ स्टूडेंट की ओर से एक जनहित याचिका दायर की गई है. याचिका में कहा गया है कि प्रदेश सरकार ने 27 अप्रैल 2016 को एक आदेश जारी कर पूर्व मुख्यमंत्रियों को, मंत्रियों के समान वेतन भत्ते और बंगले की सुविधाएं देने का प्रावधान कर दिया था, जबकि ऐसा करना ना सिर्फ मौजूदा कानूनों के खिलाफ है बल्कि जनता के पैसों का दुरुपयोग भी है.

याचिका में कहा गया है कि मध्यप्रदेश मंत्री, वेतन एवं भत्ते अधिनियम 1972 के मुताबिक मुख्यमंत्री को अपना पद खत्म होने के एक माह बाद बंगला सहित सभी सुविधाएं छोड़ देनी चाहिए जिसके खिलाफ जाकर राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को मंत्रियों के समान वेतन-भत्ते सहित सभी सुविधाएं देने का प्रावधान कर दिया.

याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार बनाम लोकप्रहरी केस का भी हवाला दिया गया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगले अलॉट न करने का आदेश सुनाया था. याचिका में प्रदेश सरकार के अलावा पूर्व मुख्यमंत्रियों कैलाश जोशी, दिग्विजय सिंह और उमा भारती को भी पक्षकार बनाया गया है.