कोलकाता वन-डे के दौरान विराट कोहली अपने वन-डे करियर में एक और शतक लगाने के बेहद करीब पहुंच चुके थे. लेकिन वो अपने 31वें शतक से चूक गये. ये उनके करियर में सिर्फ छठा मौका था जब कोहली 90 का स्कोर पार करने के बाद सैकड़ा छूने में नाकाम हुए. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के दूसरे वनडे मुकाले में  कोहली 8 रन से शतक के साथ ही एक “खास शतक “ से भी चूके. इंटरनेशनल क्रिकेट में कोहली अब तक 47 सेंचुरी लगा चुके हैं, जबकि भारत की ओर से राहुल द्रविड़ (48) और सचिन तेंदुलकर (100) ही उनसे आगे हैं.

टीम इंडिया के कप्तान कोहली के लिए उनके फॉर्म और फिटनेस को देखते हुए कोई भी रिकॉर्ड विराट नहीं लगता है. जिस अंदाज़ में विराट एक के बाद एक करके वनडे क्रिकेट में नए रिकॉर्ड बना रहे हैं उससे ये साफ है कि सचिन तेंदुलकर का वनडे क्रिकेट में 49 शतक का अदभुत रिकॉर्ड भी ख़तरें में है और अगर कोहली ने वनडे क्रिकेट में इस रिकॉर्ड को हासिल कर लिया तो क्या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तेंदुलकर के ही 100 शतकों के रिकॉर्ड को उनके लिए तोड़ना मुश्किल होगा?

बहरहाल, सौ शतक से पहले इसके आधे पड़ाव की चर्चा कर ली जाए. कोहली के नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में 47 शतक हैं. अगर वो एक और शतक बनाते हैं तो राहुल द्रविड़ के 48 शतकों की बराबरी कर लेंगे. भारत के लिए तेंदुलकर के बाद द्रविड़ के नाम ही सबसे ज़्यादा इटंरनेशनल शतक का रिकॉर्ड है. यानि ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ बचे हुए 3 वनडे और 3 टी20 के दौरान कोहली के पास मौका है कि वो 50 शतक पूरे कर लें.

अगर वो ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ ऐसा नहीं भी कर पायें तो न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ वनडे और टी20 सीरीज़ है और फिर श्रीलंका के खिलाफ भी रन बनाने का मौका है. यानि इस बात की प्रबल संभावना है कि साल 2017 के ख़त्म होते-होते कोहली के पास 50 से 55 शतक हों.

अगर कोहली ये हासिल कर पाते हैं तो उनका अगला लक्ष्य रिकी पोंटिंग के 71 शतक को तोड़ने का होगा. इंटरनेशनल क्रिकेट में तेंदुलकर के बाद पोंटिंग के नाम ही सबसे ज़्यादा शतक का रिकॉर्ड हैं. मौजूदा समय में कोहली क्रिकेट इतिहास में सबसे ज़्यादा शतक बनाने वालों की सूची में 9वें नंबर पर हैं. मौजूदा खिलाड़ियों में सिर्फ हाशिम आमला (51) ही उनसे आगे हैं.

कोहली ने अब तक अपने करियर में कई मिथक को तोड़ा है. स्थिरता के मामले में वो द्रविड़ को भी पीछे छोड़ते दिख रहें हैं. फिटनेस के मामले में वो असाधारण दिख रहे हैं. कामयाबी की भूख उनमें अविश्वसनीय है. ये सब बातें इस बात को ही बढ़ावा देती हैं कि इसमें कोई बड़ी बात नहीं है कि कोहली के लिए अब उनके करियर का विराट लक्ष्य सौ शतक ही हो.

उनके इस बयान में वो भरोसा नहीं है. इसमें सचिन की कोई ग़लती नहीं है. 2013 में आपसे और हमसे भी अगर कोई ये कहता तो हम भी उसका मज़ाक ही उड़ाते या फिर उसे चुप रहने कह देते. लेकिन, पिछले 4 सालों में कोहली ने पूरी दुनिया को ये दिखाया है वो इस पीढ़ी के लिए नये तेंदुलकर है.

तेंदुलकर की तमाम कामयाबी के बावजूद आलोचकों का एक वर्ग हमेशा सक्रिय रहा ये बताने के लिए कि तेंदुलकर अपने शतक से उतने मैच नहीं जीतते हैं. हालांकि, ये कुतर्क था और आंकड़े इस बात की गवाही भी देते हैं. लेकिन, कोहली के लिए ऐसी कोई आलोचना नहीं होती है. कोहली अगर वनडे क्रिकेट में बैटिंग कर रहे हैं तो वो मैच जिताकर ही वापस लौटते हैं. कोहली की छवि मैच फिनिशर और मैच-विनर दोनों के तौर पर है.