पुरुष कर्मचारियों के लिए बुरी खबर है और उन्हें तुरंत सावधान हो जाने की ज़रूरत है. आपके काम करने की अनियमित दिनचर्या से आपकी सेक्स लाइफ प्रभावित होने के साथ ही आपकी बाप बनने की ख्वाहिश भी खत्म हो सकती है.

वैसे नींद में कमी हमेशा से तमाम डिसऑर्डर (विकार) की वजह होती है और इनमें मोटापा और हृदय रोग भी शामिल हैं.

एक आम इंसान को रोजाना रात में सात से आठ घंटे की नींद की जरूरत होती है. मौजूदा दौर में काम करने का अनियमित वक्त, अनुचित डेडलाइन और अन्य कारणों से जरूरत भर की नींद और आराम में खलल पड़ने लगा है.

दिल्ली स्थित एक प्रमुख अस्पताल में आईवीएफ और इंफर्टिलिटी के निदेशक के मुताबिक जो पुरुष शिफ्टों में काम करते हैं, वे इसके सबसे खराब पीड़ित होते हैं.

काम करने के तरीके से कर्मचारी के स्वास्थ्य पर फर्क पड़ता है और इससे उसकी नींद, खाने के वक्त और व्यायाम करने की क्षमता प्रभावित होती है.

इसके अलावा नींद की कमी से मूत्र संबंधी और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी समस्याएं होती हैं. इसके पीछे कारण यह होता है कि अनियमित या बिगड़ी दिनचर्या से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन स्तर में कमी आ जाती है.

टेस्टोस्टेरोन एक हॉर्मोन है, जो पुरुषों की यौन इच्छाएं बढ़ाने में मददगार होता है. इसके स्तर में कमी से सीमेन (वीर्य) की गुणवत्ता कम होती है और इसके परिणामस्वरूप बच्चे पैदा करने में मुश्किलें आती हैं.

इसके अलावा हाल के वर्षों में बिगड़ी दिनचर्या, खानपान की गुणवत्ता में आई कमी और वातावरण में मौजूद जेंडर-बेंडिंग केमिकल्स से पुरुषों की प्रजनन क्षमता प्रभावित हुई है.

बहुत ज्यादा या फिर बहुत कम नींद से भी शरीर की जरूरी और प्राकृतिक लय (सर्कैडियन) में फर्क पड़ता है. यह सर्कैडियन रिद्म नींद के हार्मोन मेलाटॉनिन और स्ट्रेस हार्मोन (कार्टिसोल) को नियंत्रित करता है.

जो लोग लगातार अलग-अलग शिफ्टों में काम करते हैं, उनकी सर्कैैटियन रिद्म लगातार बदलती रहती है जिससे उसी तरह की समस्या (जेट लैग) पैदा हो जाती है जो एक टाइम-जोन से दूसरे टाइम-जोन में यात्रा करने वाले यात्रियों को हो जाती है.

हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव से शुक्राणु (स्पर्म) पैदा करने वाले जीन में बदलाव होने लगता है. न केवल इतना बल्कि अनियमित नींद से अनिद्रा का जोखिम या अत्यधिक नींद आने की संभावना बढ़ जाती है और काम के हिसाब से नींद के कुल वक्त में कमी आ जाती है.

अनियमित नींद वाली दिनचर्या के परिणामस्वरूप शुक्राणु निकलने वाली नली में अवरोध आ जाता है और इसके चलते वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बिल्कुल ख़त्म हो जाती है.