मोहर्रम का महीना शुरू होते ही दुनिया के हर कोने में मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन अपने तरीके से गम का इजहार करते हैं. मोहर्रम पर दुनिया भर से आशिके हुसैन अजमेर पहुंचकर मोहर्रम मनाते हैं. इसी को देखते हुए अजमेर में ज़ायरीनों के आने का सिलसिला शुरू हो चुका है.

सूफी संत हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में मोहर्रम की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. यहां दरगाह की अंजुमन कमेटी की जानिब से सबसे बड़ा ताज़िया बनाया जाता है. ताज़िया बनाने का काम ईद-उल-फितर के बाद से ही शुरू हो जाता है और मोहर्रम से पहले पूरा कर दिया जाता है.

मोहर्रम को मिनी उर्स भी कहा जाता है. जिला प्रशासन की तरफ से मिनी उर्स पर आने वाले ज़ायरीन को सहूलियत देने के लिए सभी डिपार्टमेंट्स की मीटिंग बुलाकर दरगाह इलाके और कायड़ विश्राम स्थली पर इंतजाम किए जाते है. इसमे दरगाह कमेटी के मेंबर भी मौजूद रहते हैं.

कायड़ विश्राम स्थली और दरगाह इलाके में पानी, बिजली, नालियों, सड़को के अलावा अतिक्रमण की काफी समस्या है. लोगों ने बताया कि जगह-जगह पर बिजली के तार खुले पड़े हैं जिससे आने जाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. जिला प्रशासन इन सभी कामों को जल्द दुरस्त करके आने वाले ज़ायरीन को बेहतर सहूलियत देने की कोशिश में लगी है.

दरगाह में आने वाले ज़ायरीन की हिफाज़त के लिए पुलिस प्रशासन और दरगाह कमेटी ने दरगाह के अंदर कैमरे लगा रखे हैं जिसपर हर वक्त दरगाह थाने में बने कंट्रोल रूम से नज़र रखी जाती है.