शनिवार दि॰ 23.09.17 आश्विन शुक्ल तृतीया अर्थात शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा का पूजन किया जाता है। शुक्र ग्रह प्रधान देवी चंद्रघंटा व्यक्ति के यौवन व प्रेम पर अधिपत्य रखती हैं। वीरमुद्रा में मस्तक पर घंटे नुमा अर्धचंद्र व चमकते तारे जैसा इनका रूप परम वैभवशाली है। अनेक रत्नों व शास्त्रों से सुशोभित देवी के गले में पुष्पमाला है। कालपुरूष व वास्तुपुरुष सिद्धांत के अनुसार अग्नि तत्व प्रधान देवी चंद्रघंटा कुंडली के दूसरे व सातवें भाव पर अपनी सत्ता से व्यक्ति के सुख, ऐश्वर्य, संपन्नता, प्रेम, संभोग व कामना पर अपना स्वामित्व रखती है। दक्षिण-पूर्व दिशा को शाषित करने वाली चंद्रघंटा की पूजा चावल की खीर व इत्र से करनी चाहिए। इनकी साधना से बिछड़े प्रेमी आपस में मिल जाते हैं, कुंवरों का जल्द विवाह होता है तथा प्रेम में सफलता मिलती है।

विशेष पूजन: देवी चंद्रघंटा का विधिवत पूजन करें। गौघृत में इत्र मिलाकर दीपक जलाएं, चंदन की अगरबत्ती करें, अबीर चढ़ाएं, गुलाबी फूल चढ़ाएं, चावल की खीर का भोग लगाएं तथा 1 माला विशेष मंत्र जपें। पूजन उपरांत चावल की खीर किसी कन्या को खिलाएं।


पूजन मुहूर्त: प्रातः 08:20 से प्रत 09:20 तक।


विशेष मंत्र: ॐ चण्ड्यै कामिन्यै नमः ॥


कल के शुशाशुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त:
दिन 11:49 से दिन 12:37 तक।


गुडलक काल: प्रातः 06:13 से प्रातः 07:43 तक।


यमगंड काल: दिन 13:43 से दिन 15:12 तक।


अमृत काल: शाम 16:52 से शाम 18:34 तक।


राहु काल: प्रातः 09:13 से प्रातः 10:43 तक।


यात्रा महूर्त: दिशाशूल - पूर्व। राहुकाल वास - पूर्व। अतः पूर्व दिशा की यात्रा टालें।


कल का गुडलक ज्ञान


गुडलक कलर: नीला।


गुडलक दिशा: पश्चिम।


गुडलक टाइम: शाम 19:18 से रात 20:53 तक।


गुडलक मंत्र: ॐ मदनसुन्दर्यै नमः॥


गुडलक टिप: सौन्दर्य में निखार हेतु देवी चंद्रघंटा पर चढ़े चंदन का लेप इस्तेमाल करें।


एनिवर्सरी गुडलक: दंपत्ति किसी ब्राह्मण स्त्री को गुलाबी कपड़े में शक्कर बांधकर भेंट करें।


बर्थडे गुडलक: कमल का फूल देवी चंद्रघंटा पर चढ़ाकर घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थापित करें।