मध्य प्रदेश के नीमच में 100 करोड़ की संपत्ति और तीन साल की मासूम बेटी को छोड़कर संन्यास ले रहे दंपति के मामले में सस्पेंस खत्म हो गया है. ऐन मौके पर मासूम बेटी की मां अनामिका के दीक्षा कार्यक्रम को टाल दिया गया, जबकि कारोबारी सुमित राठौड़ दीक्षा ग्रहण कर सुमित मुनि बन गए.

गुजरात के सूरत शहर में शनिवार सुबह हजारों लोगों की मौजूदगी में जैन मुनि आचार्य रामलाल महाराज के सानिध्य में सुमित राठौड़ को दीक्षा दी गयी. विधिवत तरीके से केशलोचन के बाद सुमित राठौड़ को साधु के वस्त्र धारण कराए गए. साथ ही उन्हें सुमित मुनि नाम दिया गया.

आयोजन के प्रभारी की तरफ से बताया गया है कि जैन आचार्य ने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि अनामिका को भी दीक्षा की अनुमति दे दी गई है. उनकी दीक्षा का कार्यक्रम कानूनी प्रकिया को पूरा करने के बाद होगा.

दरअसल, मासूम बेटी को छोड़कर संन्यास लेने की बात पर देशभर में बहस छिड़ी हुई थी. जैन समुदाय और सामाजिक हलकों में भी पक्ष और विपक्ष में आवाजें मुखर हो रही थी.

-इस बात का जमकर विरोध हुआ की मासूम बच्ची को छोड़कर दीक्षा ना ली जाए.
-सामाजिक कार्यकर्ताओ ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, महिला बाल विकास विभाग,जिला कलेक्टर और चाइल्ड केयर में शिकायत दायर की थी.
-शिकायत में कहा गया था कि बेटी के बड़े होने तक दीक्षा लेने से रोका जाए.

देशभर में यह मुद्दा उठने पर आखिरकार पत्नी अनामिका की दीक्षा रद्द कर दी गयी. जबकि 22 सितम्बर को सूरत में एक शपथ पत्र भी बनाया गया था, जिसमें बेटी के नाना अशोक चंडालिया को उसका गार्जियन बनाया गया था.

इस शपथ पत्र के बाद यह माना जा रहा था की अब दीक्षा नहीं रुकेगी और पति-पत्नी दोनों ही दीक्षा लेंगे. लेकिन इस पूरे मामले में शुक्रवार शाम एक यू-टर्न आया जब सूरत का स्थानीय प्रशासन वहा पहुंचा. सूरत कमिश्नर, बाल आयोग के अधिकारी और कलेक्टर की जैन मुनियों और वरिष्ठ समाजजनों से हुई लंबी चर्चा के बाद अनामिका के दीक्षा कार्यक्रम को टाल दिया गया.