पुराणों के अनुसार कुछ ऐसे संकेत हैं जिससे पता चलता है की नवदुर्गा के साथ-साथ समस्त ब्रह्माण्ड की शक्तियां भी आप पर मेहरबान हैं। शास्त्रों के अनुसार नवरात्र में कंजक पूजन का विशेष महत्व है। दो साल की कन्या से लेकर नौ वर्ष तक की कन्या को मां का स्वरूप माना जाता है। माना जाता है कि आहुति, उपहार, भेंट, पूजा-पाठ और दान से मां दुर्गा इतनी खुश नहीं होतीं, जितनी कंजक पूजन और लोंगड़ा पूजन से होती हैं। अपने भक्तों को सांसारिक कष्टों से मुक्ति प्रदान करती हैं। 9 दिनों में कोई कंजक अपनी इच्छा से आपके हाथों में सिक्का थमा दें तो समझ जाएं निकट भविष्य में धन की देवी आपके घर में वास करने वाली हैं।

भारतीय संस्कृति में सोलह श्रृंगार को शुभता का संकेत माना गया है। जिस घर की महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, वहां सुख और समृद्धि अपना बसेरा बना कर वास करती हैं। नवरात्र में महिलाएं खास तौर पर सजती-संवरती हैं। जिस दिन आपको किसी ऐसी महिला के दर्शन हो जाएं जो सोलह श्रृंगार से सजी हो। उस दिन आपको हर काम में सफलता प्राप्त होगी।

सपने में कोई माचिस जलाता है, तो उसे ऐसी जगह से धन की प्राप्ति होती है जहां से  कोई उम्मीद नहीं होती। यदि सपने में कोई चेक लिख कर दे तो इसका मतलब आपको विरासत में धन मिल सकता है तथा व्यवसाय में भी वृद्धि हो सकती है। सपने में कोई आप पर कानूनी मुकदमा चला रहा है, जिसमें वह निर्दोष छूट गया है तो उसे अतुल धन संपदा की प्राप्ति हो सकती है। किसी को धन उधार दे रहे हैं तो अत्यधिक धन की प्राप्ति हो सकती है।

सफेद गाय का दिखना अथवा घर के बाहर आना शुभ संकेत है।

सुबह के समय शंखनाद अथवा मंदिर की घंटियां सुनना, दिन सुहाना बनाता है।

यात्रा के आरंभ में हमें ब्राह्मण, घोड़ा, हाथी, फल, अन्न, दूध, दही, गौ, सरसों, कमल, श्वेत वस्त्र, मोर, जलपूर्ण कलश, मिट्टी, कन्या, रत्न, पगड़ी, बैल, संतान सहित स्त्री, मछली, पालकी दिखाई दे तो ये शुभ संकेत होते हैं। 

यदि रात्रि को उल्लू के दर्शन हो जाएं तो इसका अर्थ है कि धन का नुक्सान होने वाला है लेकिन प्रात:काल उल्लू की आवाज सुनना मंगलकारी माना गया है। यदि किसी के आंगन में उल्लू मरा हुआ मिले तो यह उस घर में पारिवारिक कलह का सूचक है और यदि किसी विशेष स्थान पर उल्लू  नियमित रूप से आने लगे तो इसे किसी भयानक व दुखदायी घटना का सूचक माना जाता है।