सोमवार दि॰ 25.09.17 आश्विन शुक्ल पंचमी अर्थात शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन बुद्ध ग्रह प्रधान देवी स्कंदमाता का पूजन किया जाएगा। देवी स्कंदमाता व्यक्ति की पैतृक भूमिका पर अपना आधिपत्य रखती हैं। सिंह पर सवार कार्तिकेय को गोद में उठाए, कमल पुष्प धारिणी देवी स्कंदमाता का वर्ण पूर्णत: शुभ है। कालपुरूष व वास्तुपुरुष सिद्धांत के अनुसार उत्तर दिशा की अधिष्ठात्री देवी स्कंदमाता व्यक्ति की कुंडली के तीसरे व छठे भाव पर अपनी सत्ता से व्यक्ति की सेहत, बुद्धिमत्ता, चेतना, तंत्रिका-तंत्र व रोगमुक्ति पर अपना स्वामित्व रखती हैं। इनकी पूजा दोपहर में हरे रंग की चूडियों, चंपा पुष्पों व मूंग से बने मिष्ठानों से करनी चाहिए। इनके पूजन से गृहक्लेश से मुक्ति मिलती है, लाइलाज बीमारियों का इलाज होता है।

विशेष पूजन: देवी स्कंदमाता का विधिवत पूजन करें। चंपा इत्र मिश्रित घी का दीपक करें, सुगंधित धूप करें, गौलोचन चढ़ाएं, सफ़ेद फूल, मूंग के हलवे का भोग लगाएं
तथा 1 माला विशेष मंत्र जपें। पूजन उपरांत हलवा किसी कन्या को खिलाएं।


पूजन मुहूर्त: दिन 11:48 से दिन 12:36 तक। (अभिजीत) 


विशेष मंत्र: ॐ ईशान्यै नमः॥


कल के शुशाशुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दिन 11:48 से दिन 12:36 तक।


गुलिक काल: दिन 13:41 से शाम 15:11 तक।


यमगंड काल: प्रत 10:43 से दिन 12:12 तक।


अमृत काल: शाम 18:50 से रात 20:35 तक।


राहु काल: प्रातः 07:44 से प्रातः 09:13 तक।


यात्रा महूर्त: दिशाशूल - पूर्व। राहुकाल वास - उत्तर-पश्चिम। अतः पूर्व व उत्तर-पश्चिम दिशा की यात्रा टालें।


कल का गुडलक ज्ञान
गुडलक कलर: शुभ्र।


गुडलक दिशा: उत्तरपूर्व।


गुडलक टाइम: शाम 16:18 से शाम 17:45 तक।


गुडलक मंत्र: ॐ रुद्राण्यै नमः॥


गुडलक टिप: लाइलाज बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए देवी स्कंदमाता पर पान का पत्ता चढ़ाएं।


बर्थडे गुडलक: बुद्धिबल में वृद्धि हेतु देवी स्कंदमाता पर चंपा का इत्र चढ़ाकर इस्तेमाल करें।


एनिवर्सरी गुडलक: गृहक्लेश से मुक्ति के लिए किसी किन्नर को हरे मूंग का दान करें।