मंगलवार दि॰ 26.09.17 आश्विन शुक्ल छठी अर्थात शारदीय नवरात्रि के छठे दिन बृहस्पति ग्रह प्रधान देवी कात्यायिनी का पूजन किया जाएगा। देवी कात्यायिनी व्यक्ति की अधेड़ उम्र को संबोधित करती हैं। महर्षि कात्यायन की पुत्री रूप में जन्म लेने के कारण देवी के इस स्वरूप को कात्यायनी नाम मिला। कमल, तलवार व स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित पीत वरणीय चतुर्भुजी देवी सिंह पर सवार हैं। कालपुरूष व वास्तुपुरुष सिद्धांत के अनुसार उत्तरपूर्व दिशा की अधिष्ठात्री देवी कात्यायिनी व्यक्ति की कुंडली के बारहवें व नौवें भाव पर अपनी सत्ता से व्यक्ति की धर्म, भाग्य, इष्ट, हानि, व्यय, व मोक्ष पर अपना स्वामित्व रखती है। इनकी पूजा गौधूलि वेला में पीले फूल, हल्दी व बेसन के हलवे से करनी चाहिए। इनके पूजन से दुर्भाग्य से छुटकारा मिलता है, दुश्मनों पर जीत हासिल होती है और अविवाहितों का शीघ्र विवाह होता है।

 

विशेष पूजन: देवी कात्यायिनी का विधिवत पूजन करें। हल्दी मिश्रित घी का दीपक करें, सुगंधित धूप करें, पीत चंदन चढ़ाएं, पीले फूल, बेसन के हलवे का भोग लगाएं। तथा 1 माला विशेष मंत्र जपें। पूजन उपरांत हलवा किसी कन्या को खिलाएं।


पूजन मुहूर्त: शाम 16:40 से शाम 17:41 तक। (गौधूलि) 


विशेष मंत्र: ॐ कात्यायन्यै नमः॥


कल के शुशाशुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त:
दिन 11:46 से दिन 12:33 तक।


गुड लक काल: दिन 12:12 से दिन 13:34 तक।


यमगंड काल: प्रातः 09:13 से प्रातः 10:42 तक।


अमृत काल: रात 12:06 से रात 01:53 तक।


राहु काल: शाम 15:10 से शाम 16:39 तक। 


यात्रा मुहूर्त: दिशाशूल - उत्तर। राहुकाल वास - उत्तर। अतः उत्तर दिशा की यात्रा टालें।


कल का गुडलक ज्ञान
गुडलक कलर:
नारंगी।


गुडलक दिशा: दक्षिण।


गुडलक मंत्र: ॐ शङ्कराय नमः॥


गुडलक टाइम: रात 20:45 से रात 21:45 तक।


गुडलक टिप: दुश्मनों पर विजयश्री हेतु देवी कात्यायिनी पर पीले कनेर के फूल चढ़ाएं।


बर्थडे गुडलक: दुर्भाग्य से मुक्ति के लिए देवी कात्यायिनी पर 12 सबूत हल्दी की गांठे चढ़ाएं। 


एनिवर्सरी गुडलक: विवाह बाधा से मुक्ति के लिए देवी कात्यायिनी पर चढ़ा सिंदूर इस्तेमाल करें।