मंगलवार दि॰ 27.09.17 आश्विन शुक्ल सप्तमी अर्थात शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन शनि ग्रह प्रधान देवी कालरात्रि का पूजन किया जाएगा। भगवान विष्णु की योगनिंद्रा शुभकरी देवी कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत भयंकर हैं। यह काल का अंत करती हैं। काजल वर्ण त्रिनेत्री चतुर्भुजी देवी कंठ में विद्युत माला पहने गर्दभ पर सवार होकर तलवार व खड्ग धारण किए हैं। कालपुरूष व वास्तुपुरुष सिद्धांत के अनुसार पश्चिम दिशा की अधिष्ठात्री देवी कुंडली के दशम और एकादश कालरात्रि भाव पर अपनी सत्ता से व्यक्ति के कर्म, प्रोफैशन, पितृ, पिता, आय, लाभ, नौकरी पर अपना स्वामित्व रखती हैं। इनकी पूजा रात्रि में नीले फूल, काजल व उड़़द के मिष्ठानों से करनी चाहिए। इनकी साधना शनि के दोषों को शांत करती हैं, कर्म क्षेत्र मज़बूत होता है। नौकरी में प्रमोशन व इन्क्रीमेंट मिलता है।

विशेष पूजन: रात्र में देवी कालरात्रि का विधिवत पूजन करें। तिल के तेल का दीपक करें, लोहबान से धूप करें, काजल चढ़ाएं, नीले फूल, उड़द गुड़ के पुए का भोग लगाएं। तथा 1 माला विशेष मंत्र जपें। पूजन उपरांत भोग किसी कन्या को खिलाएं।

पूजन मुहूर्त: रात 19:08 से रात 20:37 तक। (रात्रि) 

विशेष मंत्र: ॐ कालरात्र्यै नमः॥

कल के शुशाशुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त:
नहीं है।

गुलिक काल: प्रातः 10:42 से दिन 12:11 तक।

यमगंड काल: प्रातः 07:44 से प्रातः 09:13 तक।

अमृत काल: अगली सुबह 05:46 से प्रातः 07:34 तक।

राहु काल: दिन 12:11 से दिन 13:40 तक। 

यात्रा मुहूर्त: दिशाशूल - उत्तर, राहुकाल वास - दक्षिण-पश्चिम, अतः उत्तर व दक्षिण-पश्चिम दिशा की यात्रा टालें।

कल का गुडलक ज्ञान
गुडलक कलर:
गहरा हरा।

गुडलक दिशा: उत्तर-पश्चिम।

गुडलक मंत्र: ॐ शिवदूत्यै नमः॥

गुडलक टाइम: शाम 16:10 से शाम 17:37 तक।

गुडलक टिप: प्रमोशन हेतु देवी कालरात्रि पर चढ़े हुए 10 लौंग पर्स में रखें।

बर्थडे गुडलक: शनि दोष से मुक्ति हेतु देवी कालरात्रि पर चढ़े 11 उड़द के दाने कपूर से जला दें। 

एनिवर्सरी गुडलक: पारिवारिक कलह से मुक्ति के लिए देवी कालरात्रि पर चढ़ा काजल इस्तेमाल करें।