राज्य सरकार के 20 साल की सेवा और 50 साल की आयु पूरी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के कंपलसरी रिटायरमेंट के सर्कुलर ने सभी की नींदें उड़ा दीं हैं.

सर्कुलर में प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर रिपोर्ट मुख्यालय को भेंजे. कर्मचारियों के प्रदर्शन में कोई भी कमी पाई जाएगी तो उसे कंपलसरी रिटायरमेंट दे दिया जाएगा.

सरकार के इस निर्देश से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी आक्रोशित हैं उनकी मांग है कि मूल्यांकन सभी का होना चाहिए.

सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक 50 साल की उम्र और 20 साल की सेवा पूरे कर चुके कर्मचारियों के कामों की समीक्षा की जा रही है.

दरअसल, तीन स्तरों कमिश्नर,कलेक्टर और राज्य शासन स्तर पर सेवा पुस्तिका की जांच की जा रही है. समीक्षा के बाद उस पर कार्रवाई होनी है. सेवा पुस्तिका में की जाने वाली समीक्षाओं में कोर्ट में चल रहे मामलो को अलग रखकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी.

इस प्रक्रिया के शुरू होते ही विभागों में हड़कंप मच गया है. सबसे ज्यादा दहशत उन विभागों में है जहां अधिकारी औऱ कर्मचारियों पर आर्थिक अनियमितताओं की जांच चल रही है. नियम में अक्षम व्यक्तियों को भी कंपलसरी रिटायमेंट देने का प्रावधान है. लेकिन समीक्षा सिर्फ तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की होने से वे भड़क गए हैं उनका कहना है कि सभी क्षेणी के अधिकारियों के काम की समीक्षा होनी चाहिए. भेदभाव नहीं होना चाहिए.

कर्मचारियों के कामों का मूल्यांकन
1.ईमानदारी और सन्निष्ठा संदेहजनक होना,इसके लिए पूरा रिकार्ड देखा जाएगा.
2.शारीरिक क्षमता में कमी होना.
3. उपलब्धि और कार्यक्षमता का मूल्यांकन सेवाकाल में किए गए कार्य के आधार पर होगा.
4. पिछले पांच साल के दौरान काम का स्तर घट तो नहीं रहा.

वहीं राज्य के सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य का कहना है कि वे इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते है लेकिन कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ये फैसला कर्मचारी विरोधी है पचास साल की उम्र के बाद आदमी कहां जाएगा यदि कार्रवाई करनी है तो उन लोगों पर करें जिनके संरक्षण में बडे़ पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है.

बहरहाल सरकार का मानना है कि कर्मचारियों के प्रदर्शन के मूल्यांकन की आवश्यक है ये सरकार के कामकाज को मजबूत करता है लेकिन जिस तरह सरकार की इस प्रक्रिया राज्य के तीन लाख से ज्यादा कर्मचारी नाराज हो गए है उसका खामियाजा भी बीजेपी सरकार को चुनाव में उठाना पड़ सकता है.