भारतीय क्रिकेट टीम के लिए फिटनेस का मुद्दा अहम होता जा रहा है. बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी और फील्डिंग तीनों में फिटनेस काफी ज़रूरी होता है. आज का क्रिकेट 10 साल पहले खेले जाने वाले क्रिकेट से काफी बदल चुका है.

क्रिकेट में पहले चीज़ें काफी अलग हुआ करती थीं, लेकिन अब इस खेल में तेज़ी से बदलाव आ रहे हैं. अब खिलाड़ियों को फिट रहना ही होगा. अगर कोई फिट नहीं है, तो टीम उसका बोझ नहीं उठाएगी. यही वजह है कि इन दिनों भारत के टीम सिलेक्शन में कई हैरान वाले फैसले देखने को मिलते हैं.

टीम इंडिया के कंडिशनिंग कोच शंकर बासु ने खिलाड़ियों के लिए रैंडम फिटनेस टेस्ट ज़रूरी बना दिया है. इसके तहत खिलाड़ियों को कड़ी ट्रेनिंग से गुज़रना होता है. खिलाड़ियों की फिटनेस को तय करने वाले 'यो-यो टेस्ट' बासु की परियोजना है. इसी के तहत युवराज सिंह, सुरेश रैना और अमित मिश्रा जैसे स्टार खिलाड़ियों को टीम से बाहर रखा गया है.

स्टार खिलाड़ियों को इसलिए बैठना पड़ रहा है बाहर

इन खिलाड़ियों का राष्ट्रीय क्रिकेट एकेडमी (एनसीए) में 'यो-यो' टेस्ट में पास नहीं होना टीम से बाहर होने की अहम वजह रही. टीम इंडिया को नियमित तौर पर कई तरह के फिटनेस टेस्‍ट से गुज़रना पड़ता है. इनमें 'यो-यो' टेस्‍ट सबसे ज़रूरी है. इसी कारण मौजूदा भारतीय टीम को सबसे फिट टीम माना जाता है. लेकिन टीम इंडिया के ये टॉप खिलाड़ी नेशनल क्रिकेट अकेडमी में यो-यो एंडुरेंस टेस्‍ट पास करने में असमर्थ रहे.

युवराज सिंह और सुरेश रैना का चयन न होने के पीछे की वजह उनका प्रदर्शन नहीं बल्कि फिटनेस टेस्ट में फेल होना है. बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार ये दोनों ही खिलाड़ी राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में कराये गए 'यो-यो बीप टेस्ट' को पास नहीं कर पाए और इसी वजह से दोनों का नाम अंतिम 11 में शामिल नहीं किया गया.

क्या है 'यो-यो टेस्ट'
खिलाड़ियों की फिटनेस परखने के लिए यो-यो टेस्ट 'बीप' टेस्ट का एडवांस वर्जन है. 20-20 मीटर की दूरी पर दो लाइनें बनाकर कोन रख दिए जाते हैं. एक छोर की लाइन पर खिलाड़ी का पैर पीछे की ओर होता है और वह दूसरी की तरफ वह दौड़ना शुरू करता है. हर मिनट के बाद गति और बढ़ानी होती है और अगर खिलाड़ी वक्त पर लाइन तक नहीं पहुंच पाता तो उसे दो बीप्स के भीतर लाइन तक पहुंचना होता है. अगर वह ऐसा करने में नाकाम होता है तो उसे फेल माना जाता है.

ऐसे होता है टेस्ट पास
औसतन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी यो-यो टेस्ट में 21 का स्कोर करते हैं. टीम इंडिया में विराट, रवींद्र जाडेजा, मनीष पांडे लगातार यह स्कोर हासिल कर रहे हैं, जबकि बाकी खिलाड़ियों का स्कोर या तो 19.5 है या उससे ज़्यादा.

अधिकारियों ने आगे बताया कि 'यो यो' टेस्ट में हर खिलाड़ी को कम से कम 19.5 या इससे ज़्यादा अंक हासिल करने होते हैं लेकिन, युवराज और रैना दोनों ही इससे काफी कम अंक हासिल कर सके. इस मामले पर बीसीसीआई के एक अन्य अधिकारी का कहना था, "2019 विश्वकप को देखते हुए कोच रवि शास्त्री, कप्तान विराट कोहली और चयन समिति के अध्यक्ष एमएसके प्रसाद किसी तरह की कोताही बरतने के मूड में नहीं हैं. इन तीनों ने बोर्ड से भी साफ़ कह दिया है कि कितना भी बड़ा नाम क्यों न हो उसकी फिटनेस से कोई समझौता नहीं किया जाएगा."