दो तमिल सुपरस्टार रजनीकांत तथा कमल हासन राजनीति में प्रवेश करने के लिए तैयार हैं। गत दिसम्बर में अन्नाद्रमुक सुप्रीमो जयललिता के निधन के बाद से ही उनके राजनीति में प्रवेश के जोरदार कयास लगाए जा रहे थे, यद्यपि रजनीकांत ने अपने फैन्स को लगभग 2 दशकों तक असमंजस में डाले रखा। प्रश्र यह है कि क्या वे सफल होंगे? 

जहां सत्ताधारी अन्नाद्रमुक अलग-अलग दिशाओं में जा रहे अपने विभिन्न धड़ों के कारण उत्पन्न आंतरिक समस्याओं को सुलझाने के लिए संघर्षरत है, दो और खिलाडिय़ों के प्रवेश से सम्भवत: और दुविधा पैदा होगी। तमिलनाडु में हमेशा ही राजनीति तथा सिनेमा के बीच एक करीबी संबंध रहा है। कम से कम 4 मुख्यमंत्री-सी.एन. अन्नादुरई व एम. करुणानिधि (द्रमुक) तथा एम.जी. रामचन्द्रन और जे. जयललिता (अन्नाद्रमुक) ने 1967 से लेकर राज्य पर शासन किया। एक अन्य सफल फिल्म स्टार कैप्टन विजयकांत ने अपनी पार्टी डी.एम.डी.के. लांच की मगर वह उसे कायम रखने में सफल नहीं हुए।

दक्षिण भारत ने कई राजनीतिज्ञ पैदा किए हैं जो पहले अभिनेता थे। पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में एन.टी. रामाराव 1982 में मुख्यमंत्री बने। तमिलनाडु ने शिवाजी गणेशन, नेपोलियन तथा वैजयंती माला बाली, जबकि आंध्र प्रदेश ने मोहन बाबू, दासारी नारायण राव, चिरंजीवी तथा जया प्रदा जैसे अभिनेता दिए। कर्नाटक से अम्बरीश तथा राम्या जैसे अभिनेता आए। तमिलनाडु एक ऐसा राज्य है जिसकी जड़ों में दशकों से द्रविडिय़न विचारधारा गहरे समाई हुई है। द्रविडिय़न राजनीति तमिल पहचान तथा भाषा को बढ़ावा देती है क्योंकि थिएटर तथा फिल्में जनता को प्रभावित करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली औजार बन गए हैं। दरअसल 1967 से ही, जब कांग्रेस ने द्रमुक को सत्ता खो दी, द्रमुक तथा अन्नाद्रमुक बारी-बारी से राज्य में शासन करती रही हैं। 

एम.जी.आर. ने द्रमुक से अलग होकर सफलतापूर्वक अपनी पार्टी अन्नाद्रमुक को लांच किया और अपनी फिल्मी भूमिकाओं और गरीब हितैषी सामाजिक संदेशों के कारण मुख्यमंत्री बने। जहां तक जयललिता की बात है, वह एम.जी.आर. की एक सफल हीरोइन तथा खुद अपने दम पर एक लोकप्रिय अभिनेत्री थीं। इसलिए ये दो सुपरस्टार ऐसी क्या नई चीज पेश कर सकते हैं जो लोगों को लुभा सके? कमल हासन तथा रजनीकांत दो अलग व्यक्तित्व हैं। रजनी एक आध्यात्मिक व्यक्ति हैं, जबकि कमल खुद को नास्तिक कहते हैं। दोनों ने कुछ फिल्मों में इक_े भी काम किया है। कमल हासन ने अत्यंत प्रशंसनीय फिल्मों में अभिनय तथा निर्देशन किया है, जिनमें से 7 को आधिकारिक तौर पर आस्कर में प्रवेश मिला। उन्हें सूझवान वर्ग का समर्थन हासिल है जबकि रजनीकांत गरीब आदमी के हीरो हैं जिनके खाते में बाक्स आफिस पर कई हिट फिल्में हैं। 

उन्होंने एम.जी.आर. की तरह रॉबिनहुड किस्म की भूमिकाएं भी निभाने का प्रयास किया। कमल हासन के विपरीत राज्य के मतदाताओं के बीच रजनीकांत की लोकप्रियता प्रमाणित है। 1996 के चुनावों से पूर्व रजनी की प्रसिद्ध टिप्पणी कि ‘यदि जयललिता सत्ता में आती हैं तो भगवान भी तमिलनाडु को नहीं बचा सकते’ के परिणामस्वरूप द्रमुक को चुनावों में जबरदस्त विजय प्राप्त हुई। जहां रजनीकांत तभी से राजनीति में प्रवेश करने पर विचार कर रहे हैं, कमल हासन ने दावा किया है कि राजनीति में उनका प्रवेश बाध्यताओं से परे है न कि उनका चुनाव। दूसरे, द्रमुक तथा अन्नाद्रमुक का आधार है और यहां तक कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अच्छा पार्टी नैटवर्क है। चूंकि 2019 के लोकसभा चुनावों में महज 18 महीने बचे हैं, वे कैसे अपनी नई पाॢटयां बनाएंगे? सम्भवत: उनके फैन्स तैयार होंगे मगर इतना ही काफी नहीं होगा। 

तीसरे, उनका नया अफसाना क्या होगा? दोनों ही भ्रष्टाचार की बात कर रहे हैं और तमिलनाडु सबसे भ्रष्ट राज्यों में से एक है मगर यह मुद्दा कितना प्रभावी होगा? कमल हासन ने हाल ही में दावा करते हुए कहा कि यह उनके सक्रिय राजनीति में आने के लिए सही समय है क्योंकि हर जिस चीज के गलत होने की सम्भावना है वह गलत हो रही है। उन्होंने कहा कि हमें बेहतर प्रशासन की जरूरत है। वह तुरन्त समाधान का वायदा नहीं करते मगर परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करने का वायदा करते हैं। उन्होंने अपने पार्टी के एक व्यापक ढांचे बारे संकेत दिया, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाएगी तथा विकासोन्मुख होगी। रजनीकांत ने अपनी  हालिया टिप्पणियों में यह भी कहा था कि उनकी राजनीति में आने की कोई इच्छा नहीं है, यदि वह आते हैं तो वह ‘हमेशा धन के बारे में सोचने वाले’ सभी लोगों को बाहर का रास्ता दिखाएंगे। 

चौथे, पार्टी चलाने के लिए अत्यंत धनराशि की जरूरत पड़ती है और वे कहां से करोड़ों रुपए लाएंगे? उनके अधिकांश फैन्स गरीब वर्ग से हैं और उनमें से कोई भी सम्भवत: अपना धन खर्च नहीं करेगा। यदि उनके समर्थन में कुछ धनवान लोग नहीं आते, नई पाॢटयां सम्भवत: सफल नहीं हो पाएंगी। पांचवें, तमिलनाडु जैसे राज्य में, जिसने ब्राह्मण प्रभुत्व से छुटकारा पाया है, कमल हासन, जो ब्राह्मण हैं, कैसे अन्य जातियों के वोट हासिल करेंगे, जब तक कि उनकी नई पार्टी अन्य जाति आधारित पाॢटयों से गठबंधन नहीं बनाती। रजनीकांत के लिए कोई समस्या नहीं है क्योंकि भाजपा उन्हें अपनाने को तैयार है। 

छठे, जहां भाजपा रजनीकांत को मुख्यमंत्री का पद देने की इच्छुक है, यह स्पष्ट नहीं है कि कमल हासन किस तरफ जाएंगे। जब हाल ही में उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री विजयन से मुलाकात की तो उनके वामपंथी विचारधारा की ओर झुकाव के कयास लगाए जा रहे थे। मगर एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि वे मध्य मार्ग अपनाना चाहते हैं, किसी एक पक्ष की तरफ झुकना नहीं। आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल के साथ बहु प्रचारित लंच के बाद संदेहों को खत्म करते हुए हाल ही में कमल हासन ने कहा कि वह आम आदमी पार्टी से सबक लेंगे मगर उनके साथ कोई सांझेदारी नहीं है।

यह जरूरी नहीं है कि सिर्फ इसलिए कि आप फिल्म जगत  में  सफल हुए हैं तो वास्तविक दुनिया में भी सफल होंगे। रजनी ने स्वीकार किया है कि प्रसिद्धि तथा धन राजनीति में विजय प्राप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इनके अतिरिक्त और कुछ भी चाहिए मगर उन्हें नहीं पता कि वह क्या है। रजनीकांत, यह किस्मत की बात है और  यदि  यह आप पर मुस्कुराती है तो आपकी विजय सुनिश्चित है।