लखनऊ: ‘यादव कुनबे’ में चले घमासान के बाद बाप-बेटे में समझौते की आ रही खबरों के बीच लोगों की नजरें अब आगामी 5 अक्तूबर को आगरा में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय सम्मेलन में मुलायम सिंह यादव के जाने पर टिक गई हैं। जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 से मुलायम सिंह यादव कुनबे में मचा घमासान गत 25 सितम्बर को उनकी प्रैस कांफ्रैंस के बाद थमता नजर आया। प्रैस कांफ्रैंस के दूसरे दिन ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने पिता और पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव से मुलाकात कर डेढ़ घंटे बात की। मुलाकात के दौरान ही उन्होंने पिता को आगरा सम्मेलन में आने का न्यौता भी दे दिया।

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार अखिलेश ने पिता के सरकारी आवास पर उनसे मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार यह मुलाकात करीब 6 महीने के अन्तराल पर हुई थी। प्रैस कांफ्रैंस में उम्मीद लगाई जा रही थी कि मुलायम सिंह यादव नई पार्टी या किसी मोर्चे के गठन की घोषणा करेंगे। इससे इतर अपने अनुज शिवपाल यादव को झटका देते हुए उन्होंने अखिलेश पर आशीर्वाद बने रहने और सपा को मजबूत करने का आह्वान कर दिया।

राजनीति के जानकारों ने इसे मुलायम सिंह यादव का दाव बताया। प्रैस कांफ्रैंस में शामिल रहे पूर्व मंत्री शारदा प्रताप शुक्ल ने तो इसे पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ मुलायम सिंह यादव की साजिश तक करार दिया। सूत्रों ने बताया कि मुलायम सिंह से नाराज उनके छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव कई बार बुलाने पर 28 सितम्बर की सुबह उनसे मिलने गए। मिलने के बाद वह इटावा रवाना हो गए। सूत्रों के अनुसार शिवपाल यादव ने उनसे नाराजगी व्यक्त की।

इस सबके बावजूद लोगों की नजरें मुलायम सिंह यादव के आगरा सम्मेलन में जाने पर लगी हुई हैं। यादव यदि सम्मेलन में शामिल होते हैं तो साफ हो जाएगा कि वह अपने पुत्र अखिलेश यादव को पार्टी की एकछत्र ताकत देना चाहते थे। आगरा सम्मेलन में नहीं जाने पर यह संदेश जरूर जाएगा कि वह परिवार में एका चाहते हैं और शिवपाल यादव को भी पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने के पक्षधर हैं।