डगमगाती अर्थव्यवस्था पर घिरी सरकार की ओर से जवाब देने का मोर्चा अब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संभाला. बुधवार को द इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) के गोल्डन जुबली ईयर समारोह में मोदी ने सभी आलोचकों को करारा जवाब दिया और आंकड़ों के साथ वार किया. मोदी ने कहा कि कुछ लोग 'शल्य' प्रवृत्ति के हैं, जिनकी आदत निराशा फैलाने की होती है ऐसे लोगों की पहचान करना काफी जरूरी है.

साफ है कि पिछले कुछ दिनों से अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर घर और बाहर से सवाल उठ रहे हैं. अब शायद उन्हीं को पीएम मोदी ने अपने अंदाज़ में जवाब दिया है. क्या पीएम मोदी का निशाना ये 5 नेता थे, और क्या पीएम 'शल्य' से इनकी तुलना कर रहे थे. यहां समझें..

1. यशवंत सिन्हा

सरकार पर अभी तक सबसे बड़ा वार बीजेपी के अंदर से ही यशवंत सिन्हा ने ही किया था. उन्होंने पहले एक लेख के जरिए फिर मीडिया के सामने गिरती अर्थव्यवस्था पर सवाल उठाए थे और वित्तमंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधा था. सिन्हा ने नोटबंदी को एक गलत फैसला और जीएसटी को जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया था. यशवंत सिन्हा ने कहा था कि वह पिछले एक साल से पीएम से मिलने का समय मांग रहे हैं, लेकिन समय नहीं मिल रहा है.

2. अरुण शौरी

अटल सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी ने भी केंद्र सरकार पर वार किया. एक टीवी चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा कि नोटबंदी के जरिए बड़े पैमाने पर काले धन को सफेद करना का काम किया गया. इस वक्त देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है और यह संकट जीएसटी की वजह से पैदा हुआ है'. शौरी बोले कि सिर्फ ढाई लोग ही पूरी सरकार चला रहे हैं और यहां किसी को नहीं सुना जाता है.

3. राहुल गांधी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी जब से अमेरिका दौरे से लौटे हैं तभी से मोदी सरकार पर हमलावर हैं. अपने गुजरात दौरे के दौरान राहुल ने वार करते हुए कहा था कि बीजेपी वालों ने इतना झूठ बोला है कि विकास पागल हो गया है. वहीं अब अमेठी दौरे पर भी उन्होंने पीएम मोदी पर हमला बोला. राहुल ने कहा कि अगर पीएम मोदी से काम नहीं हो रहा है तो वह हमें सरकार चलाने को दे दें. हम 6 महीने में लोगों को रोजगार दे देंगे.

4. पी. चिदंबरम

पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम पिछले कुछ दिनों से अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर मोदी सरकार पर लगातार निशाना साध रहे हैं. केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा के लेख पर उन्होंने ट्वीट किया था कि जयंत सिन्हा को यह पता होना चाहिए कि प्रशासनिक बदलाव, संगठनात्मक सुधार नहीं होते. अगर जयंत सिन्हा सही हैं, तो पिछली पांच तिमाही के दौरान जीडीपी में लगातार गिरावट क्यों आई है. अगर जयंत सिन्हा सही हैं, तो निजी निवेश में बढ़ोत्तरी क्यों नहीं हुई है. अगर जयंत सिन्हा सही हैं तो इंडस्ट्री की क्रेडिट ग्रोथ निगेटिव क्यों है?

5. मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के फैसले के बाद बयान दिया था कि इससे जीडीपी 2 फीसदी तक गिरेगी. और हुआ भी वैसा ही. इस पर पीएम मोदी ने पलटवार करते हुए कहा कि मैं अर्थव्यवस्था कम जानता हूं फिर भी मेरी कार्यकाल में जीडीपी ठीक है, लेकिन जो अर्थव्यवस्था जानते थे उनके कार्यकाल में अर्थव्यवस्था लगभग 8 बार नीचे गई थी.

जानें महाभारत के पात्र शल्य के बारे में

शल्य महाभारत के पात्र थे. वे माद्रा (मद्रदेश) के राजा जो पाण्डु के सगे साले और नकुल व सहदेव के मामा थे. महाभारत में दुर्योधन ने शल्य को छल द्वारा अपनी ओर से युद्ध करने के लिए राजी कर लिया था. उन्होंने कर्ण का सारथी बनना स्वीकार किया और कर्ण की मृत्यु के पश्चात युद्ध के अंतिम दिन कौरव सेना का नेतृत्व किया और उसी दिन युधिष्ठिर के हाथों मारे गए. शल्य की एक विशेषता थी कि वह शत्रु पक्ष के वीरों को हताश करने का लगातार प्रयत्न करते रहते थे.