अगर आपको लगता है कि प्रॉब्लम सॉल्व करने में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) इंसानों को मात दे सकता है, तो आप गलत हैं. एक नई स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि छह साल के एक सामान्य बच्चे का IQ (इंटेलीजेंस क्वोशन्ट) गूगल के आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) और एप्पल के सिरी (Siri) से कहीं ज्यादा है.

चाइनीज एकेडमी ऑफ साइसेंज रिसर्च सेंटर ऑन फिक्टिशस इकनॉमी एंड डेटा साइसेंज के एग्जिक्यूटिव डिप्टी डायरेक्टर यांग शी समेत तीन चाइनीज रिसर्चर्स के लिखे रिसर्च पेपर के मुताबिक, 2016 में गूगल के आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का IQ 47.28 था, जो कि एप्पल के सिरी के 23.94 के मुकाबले करीब दोगुना था. वहीं, छह साल के एक सामान्य बच्चे का IQ इससे कहीं ज्यादा है.

तेजी से बढ़ा है गूगल के AI का IQ
रिसर्चर्स ने पाया कि 18 साल के एक सामान्य वयस्क का IQ 97 होता है, जबकि छह साल के सामान्य बच्चे का IQ 55.5 होता है. जहां गूगल के AI का IQ 47.28 है. वहीं, चीनी सर्च इंजन बायडू का 32.92, माइक्रोसॉफ्ट के बिंग का 31.28 और एप्पल के सिरी का IQ 23.94 है.

गूगल के आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का IQ बड़ी तेजी से बढ़ा है. 2014 में गूगल के आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का IQ 26.5 था, जो कि 2016 में बढ़कर 47.28 हो गया. वहीं, 2014 में माइक्रोसॉफ्ट का IQ 13.5 था.



आसान नहीं AI की राह
इन टेक्नोलॉजी कंपनियों को किसी वयस्क से दो-चार हाथ करने से पहले इन्हें 6 साल के बच्चे को हारने में काफी मशक्कत करनी होगी. इस नई स्टडी ने इंसान बनाम AI सिस्टम के मुकाबले के संभावित नतीजों पर कुछ रोशनी डाली है.

पिछले हफ्ते कॉर्नेल यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी को सबमिट की गई रिपोर्ट में कहा गया है, 'मौजूदा समय में साइंटिफिक रिसर्च में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सबसे रोचक एरियाज में से एक है. इमर्जिंग इंटेलीजेंस सिस्टम से पैदा होने वाले संभावित जोखिम लगातार विवाद का स्रोत बने हुए हैं. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जोखिम से निपटने के लिए यह स्टडी एक स्टैंडर्ड इंटेलीजेंस मॉडल पेश करती है.'



आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में बढ़ी कंपनियों की दिलचस्पी
बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का डवलपमेंट एक बड़ी दिलचस्पी का विषय बन गया है. एप्पल, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियों ने AI रिसर्च में निवेश किया है और यह लगातार अपना इनवेस्टमेंट बढ़ा रही हैं.

गूगल ने 2014 में ब्रिटेन की आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस कंपनी डीपमाइंड खरीदी और इसने टॉप टैलेंट पर खर्च की जाने वाली रकम तीन गुना कर दी है. ग्लोबल ऑडिटिंग एंड कंसल्टिंग फर्म PwC की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक ऑटोमेशन ग्लोबल GDP को 14 फीसदी की मजबूती देगा.