राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 3 अक्टूबर को ग्रेटर नोएडा में हुए गैंगस्टर सुमित गुर्जर इनकाउंटर मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भेजा है.

आयोग के अनुसार इस पुलिस इनकाउंटर पर तमाम मीडिया रिपोर्ट में सवाल उठाए गए, जिसके बाद आयोग ने नोटिस भेजा है. नोटिस में प्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी से चार हफ्ते में रिपोर्ट तलब की गई है.

आयोग के अनुसार मामले में पीड़ित के परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसे मार्केट से उठाया और फर्जी इनकाउंटर दिखाकर मार दिया. इसके विरोध में परिजनों के साथ ही ग्रामीणों ने भी पुलिस स्टेशन पर विरोध किया साथ ही महामाया फ्लाइओवर को भी 45 मिनट तक ब्लॉक कर दिया था.

आयोग ने पाया कि जो सवाल पीड़ित के परिजन और ग्रामीण उठा रहे हैं, अगर वह सही है तो ये सीधे सीधे मानवाधिकार का उल्लंघन है. किसी भी अपराधी का गैरकानूनी ढंग से सफाया करना समाज के लिए अच्छा मैसेज कभी नहीं दे सकता. पुलिस के पास किसी व्यक्ति की जान लेने का अ​धिकार नहीं है. ये अपराधियों से निपटने का कानूनी तरीका नहीं है.