मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर हो या फिर द्वारिकाधीश और दानघाटी मंदिर. आमतौर पर भक्तों की संख्या को नियंत्रित करने में परेशान रहने वाले इन मंदिरों के प्रशासक आजकल भक्तों से नहीं सिक्कों की संख्या से परेशान हैं.

मंदिर प्रशासन की परेशानी ये भी है कि बैंकों ने इन सिक्कों को लेने से इंकार कर दिया है. मंदिरों की भी परेशानी ये है कि वो बोरों में बंद सिक्कों को कहां रखें और उनकी सुरक्षा कैसे करें.

जानकारों की मानें तो अकेले श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में 30 लाख रुपये से अधिक के सिक्के भक्तों ने चढ़ाए हैं. द्वारिकाधीश मंदिर में ही सात लाख रुपये से अधिक के सिक्कों भक्तों ने चढ़ाए हैं.

सबसे ज्यादा सिक्के गोवर्धन के दानघाटी मंदिर में आए हैं. मंदिर के पुजारी रामेश्वर बताते हैं कि मान्यता के अनुसार इस मंदिर में दूध-दही भी चढ़ाया जाता है. इसी दूध-दही के साथ ही भक्त सिक्के भी चढ़ाते हैं.

नोटबंदी से पहले यहां नोट चढ़ावे में आते थे. लेकिन आजकल तो सिक्कों की संख्या बढ़ गई है. मुढ़िया पूर्णिमा मेले के दौरान तो सिक्कों की संख्या और बढ़ गई है. इस मंदिर में 50 लाख रुपये से अधिक के सिक्के हैं.

वहीं मंदिर प्रशासन की जानकार रैना पालीवाल बताती हैं कि मान्यता के अनुसार यहां चढ़ावा आता है. अब अगर दान में सिक्के आ रहे हैं तो मंदिर प्रशासन इन सिक्कों को बैंक के अलावा कहां ले जाएगा.

वहीं सिंडीकेट बैंक के डीजीएम आरके गौतम का कहना है कि नियमानुसार तो कोई भी बैंक भारतीय मुद्रा लेने से मना नहीं कर सकता है. लेकिन लाखों रुपये के सिक्के छोटी सी ब्रांच में कहा रखे जाएंगे. इसलिए मंदिर प्रशासन को चाहिए कि वह उस शहर की बड़ी ब्रांच में सिक्कों को लेकर जाएं.