नई दिल्ली: भारत व पाकिस्तान के बीच वस्तु विनिमय व्यापार जारी रहेगा या नहीं, इसका फैसला न ही गृह मंत्री राजनाथ और न ही एन.आई.ए. तथा न ही अजीत डोभाल करेंगे बल्कि इसका फैसला पी.एम.ओ. कार्यालय करेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा एजैंसी ने अपनी जांच रिपोर्ट में पूरे जोर से खुलासा किया है कि जम्मू-कश्मीर और पी.ओ.के. के बीच होने वाले वस्तु विनिमय व्यापार की आड़ में टैरर फंडिंग के लिए करीब 1 हजार करोड़ का हवाला कारोबार होता है। 

एन.आई.ए. ने अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपी लेकिन कुछ समय बाद राजनाथ ने निर्देश दिया कि इस रिपोर्ट को पी.एम.ओ. को भेजा जाए। गौरतलब है कि जम्मू और कश्मीर तथा पी.ओ.के. के लोगों के बीच आपसी भाईचारे को बढ़ाने के लिए 2008 में गृह मंत्रालय ने ही इस वस्तु विनिमय व्यापार की शुरूआत की थी। उस वक्त यह तय किया गया कि इस व्यापार में करंसी मान्य नहीं होगी। केवल 21 वस्तुएं शामिल की गई थीं और उनके दाम तय करने का अधिकार भी दोनों तरफ के व्यापारियों को दिया गया था लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे यह व्यापार हवाला का बड़ा रूट बन गया। 

एन.आई.ए. ने दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के करीब 350 व्यापारियों के ठिकानों पर रेड की। शुरूआत में एन.आई.ए. का अनुमान था कि यह हवाला रैकेट 300 करोड़ का होगा लेकिन यह बाद में करीब 1000 करोड़ के आसपास निकला। एन.आई.ए. ने अपनी रिपोर्ट में पूरी डिटेल के साथ बताया है कि इस वस्तु विनिमय के जरिए कैसे हवाला का पैसा अलगाववादी ग्रुपों और पत्थरबाजों के पास पहुंचा। रिपोर्ट में एजैंसी ने इस बात का भी उल्लेख किया है कि 8 वर्षों से किस बैंक के माध्यम से इस हवाला मनी का ट्रांसफर होता रहा है।