कार्तिक माह की कृष्ण चन्द्रोदयव्यापिनी चतुर्थी के दिन किया जाने वाला यह करक चतुर्थी व्रत अखंड सौभाग्य की कामना के लिए स्त्रियां करती हैं। करवा चौथ का व्रत एक ऐसा पर्व है जिसमें भारतीय नारी की अपने पति के प्रति स्नेह तथा उसकी रक्षा की कामना की झलक साफ दिखाई देती है। किसी सुहागिन को जब अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद मिलता है तो यूं लगता है कि मानो किसी ने आंचल में सारी दुनिया की दौलत डाल दी हो और करवाचौथ वाले दिन तो हर बड़ा-बुजुर्ग बस यही आशीर्वाद देता है। इस दिन हर सौभाग्यवती स्त्री एक नई दुल्हन की तरह सजी दिखाई देती है। 


अखंड सुहाग देने वाला करवा चौथ का व्रत अन्य सभी व्रतों से कठिन है क्योंकि इस दिन महिलाएं दिन भर निर्जल रहने के बाद रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही भोजन करती हैं। दिन भर निराहार व्रत के बाद स्त्रियों को चंद्रोदय की बड़ी उत्सुकता के साथ प्रतीक्षा रहती है ताकि वे चंद्रमा का दर्शन कर व्रत का समापन कर सकें। इस व्रत की विशेषता यह है कि इसे केवल सौभाग्यवती स्त्रियां ही करती हैं। सभी आयु की स्त्रियां यह व्रत रख कर अपने पति की लंबी आयु एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना करती हैं।


करवा चौथ पूजा मुहूर्त- 17:56 से 19:10 बजे


अवधि- 1 घण्टा 14 मिनट 


करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय- 20:14  बजे


चतुर्थी तिथि प्रारम्भ- 8 अक्टूबर 16:58 बजे


चतुर्थी तिथि समाप्त- 9 अक्टूबर 14:16 बजे