राजस्थान की थर्मल विद्युत उत्पादन इकाइयों में कोयले की जबरदस्त किल्लत चल रही है. हालात ऐसे हो गए हैं कि कई थर्मल यूनिटों के पास एक से दो दिन का कोयला बचा है. कहीं तो कोयला ही खत्म हो जाने से यूनिटों का बन्द कर दिया गया है.

इतना ही नहीं एनर्जी एक्सचैंज में खरीदने के लिए अलबत्ता बिजली नहीं है और जो है भी तो काफी मंहगी है, जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की जोरदार कटौती शुरू हो गई है.

वहीं जिला मुख्यालय समेत बड़े कस्बों में पॉवर कट करने का खाका तैयार किया गया जिसे, मुख्यमंत्री राजे से मंजूरी मिलने के साथ ही शहरों में भी पॉवर कट रविवार से शुरू हो जाएगा. स्थिति इतनी गम्भीर बताई जा रही है कि दीपावली पर ब्लैक आऊट ना हो इसके लिए पॉवर कट किया जा रहा है. कोयले के संकट को लेकर सीएम राजे भी गम्भीर हैं और ऊर्जा मंत्रालय और कोल मंत्रालय के सम्पर्क में हैं.

राष्ट्रीय स्तर पर कोयले की कमी से थर्मल पावर पर निर्भर राज्यों में बिजली आपूर्ति की स्थिति अत्यधिक प्रभावित हुई है. इस वजह से राजस्थान के थर्मल पावर स्टेशनों में विद्युत उत्पादन में जोरदार कमी आ गई है. वर्तमान में प्रदेश में कोयले की कमी की वजह से विद्युत उपलब्धता में लगभग 3000 मेगावाट यानि 720 लाख यूनिट प्रतिदिन की कमी हो गई है.

इससे प्रदेश की विद्युत आपूर्ति की स्थिति प्रभावित हुई है. प्रदेश के थर्मल बिजली उत्पादक इकाइयों में कोटा थर्मल और सूरतगढ़ थर्मल के पास एक दिन का कोयला बताया जा रहा है. वहीं छबडा थर्मल में दो दिन का है और कालीसिन्ध की दोनों इकाइयों को चलाने के लिए तो कोयला खत्म हो गया है.

यही नहीं निजी क्षेत्र की पावर यूनिटों के पास भी कोयले की आपू्र्ति नहीं होने से बिजली का उत्पादन ठप हो गया है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि कोयला नहीं मिल रहा है.

असल में राजस्थान में तीन माध्यम से कोयले की आपूर्ति होती है, जिसमें साउथ इस्टर्न कोलफिल्ड लिमिटेड, नार्दर्न कोलफील्‍ड्स लिमिटेड और पारसा कांटे कोलिरियस लिमिटेड शामिल हैं और इनकी खदाने छत्तीसगढ़ और झारखंड में हैं, जहां इस बार बारिश अच्छी होने के कारण खदानों में पानी भर गया और कोयले की खदान से निकासी नहीं हो रही है. साथ ही जो निकासी अब शुरू हुई है वो कोयला अभी गीला है, जिसके चलते बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है.

यहां तक की जो कोयले का स्टॉक 140 लाख टन का हमेशा रहता है वो कॉल स्टॉक केवल तीस लाख टन रह गया है. असल में कोयला का संकट राजस्थान में ही नही है बल्कि सभी पड़ोसी राज्यों में है और सभी जगह बिजली की मांग बढ़ी हुई है. प्रदेश में अभी विंड एनर्जी का उत्पादन पूरा नहीं मिल पा रहा है.

कोयला संकट को लेकर मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे भी काफी चिन्तित हैं और ऊर्जा मंत्रालय व कोल मंत्रालय मे सम्पर्क बनाएं हुए हैं, लेकिन इन सब के बीच बिजली की मांग और सप्लाई के बीच काफी अन्तर आ गया है, लिहाजा कटौती शुरू हो गई. यहां तक बिजली कम्पनियों ने प्रदेश के सभी जिलों और बड़े कस्बों में बिजली की घोषित कटौती करने का खाका तैयार कर भेजा गया, जिसे मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी है. कटौती के तहत जिला मुख्यालय पर नौ से 11 बजे तक और 11 से 2 बजे तक बड़े कस्बों में पावर कट होगी.