करवाचौथ के दिन जहां सुहागिनें अपने पति की लम्बी उम्र की कामना के लिए व्रत रख रही हैं, वहीं राजस्थान के शेखावाटी की सैकड़ों वीरांगनाएं ऐसी भी हैं जिनके पति अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वो उन्हें आज भी जिंदा मानती हैं और खुद को सुहागिन मानकर पतियों के लिए करवाचौथ का व्रत करती हैं.

चाहे सीकर के सिगडौला के शहीद बनवारी लाल की वीरांगना संतोष देवी हों या फिर बागरियावास के शहीद सुल्तान सिंह की वीरांगना सजना देवी, शेखावाटी में ऐसी सैकड़ों वीरांगनाएं हैं जिन्होंने अपने प्रियतम को देश के लिए कुर्बाना किया है और आज भी वे अपने सीने में दर्द की कसक लिए पति की याद में करवा चौथ का व्रत करती हैं.

अग्नि के सामने साथ मरने-जीने की कसम खाने वाली इन वीरांगनाओं ने अपने पति को भले ही देश के लिए कुर्बान कर दिया हो, लेकिन पति की याद हमेशा इनके लिए जिंदा रहेगी. आज के दिन ये वीरांगनाए सुहागिनों की तरह ही व्रत करती हैं और पति की तस्वीर की पूजा करती हैं. साथ ही पूरा श्रृंगार करती हैं.

इनका कहना है कि कौन कहता है वे सुहागिन नहीं हैं. बहुत कम होती हैं जिनको वीरांगना कहलाने का हक मिलता है. वह सौभाग्याशाली हैं कि उनके पति ने देश के लिए कुर्बानी देकर हमेशा के लिए अमर हो गए और आज के चांद में अपने पति का अक्ष ढूंढती हैं और उसे याद कर व्रत खोलकर अमर पति को याद करती हैं.