बिलासपुर। जिस टाइगर को कभी खलनायक मान गोली से उड़ा दिया जाता और शिकारी हीरो बन टाइगर के शव के साथ बंदूक लेकर फॉटो खिंचवाता था, आज उलट है। कल का खलनायक टाइगर आज प्रजापालक है।
टाइगर देखने  का बाजार करोड़ो का है। सेव टाइगर पर शाही अंदाज से कितने लाल सेब से हो रहे।जाने कितने आदिवासियों को विस्थापना का दंश झेलना पड़ा और पड़ेगा पर कितने टाइगर देश में हैं बस अनुमानित गिनती है। विवादास्पद सही पर भारत वह् देश है जहां टाइगर जंगल में खामोशी से आपने को बदले हुए अस्त्तिव के लिए खंदक की लड़ाई लड़ रहा है। जिप्सी सफारी कोई सुरक्षित नहीं,पर टाइगर ने अपने स्वभाव को बदला है. नहीं तो खुली जिप्सी में बैठा कोई व्यक्ति उठा लेना उसके बाएं पंजे का खेल है।  प्रजापालक टाइगर जानता है, तन कर दो पैरों पर चलने वाला जिप्सी में उसके दर्शन करने दूर से आया है।
महंगे होटल में पार्क से बाहर रुका है, जो एन्जॉय करने आये हैं वो अपनी हैसियत से महंगी मदिरा का पान करता है। पेट खराब हो जाये पर मुर्गा खाता है। वेस्टर्न कमोड,गीजऱ का इस्तेमाल करता है।
टाइगर  गरजता या उनपर गुर्राता नहीं,वो जनता है, एक बार झपटा, तो इस वन्य प्रेमी का पेट ठीक हो जाएगा पर पेंट पीली और गीली हो जायेगी। लाखों होटल जंगल में गुलज़ार हैं,बस जेब भारी होंनीं चाहिए। पर्यटन उद्योग चल रहा है। ऑन लाइन बुकिंग होती है। सब एक दो माह तक बुकिंग दिखयेगी पर, शहरों में सेवक हाजिर हैं,होटल,जिप्सी, सब बुक,करें पार्क के भीतर जाने की औपचरिकता वो पूरी कर देगें। जाने कम्प्यूटरजी ये सब कैसे कर लेते हैं।
टाइगर देखने की क्रेज है। आज वो बड़ा जो ये शाही शौक पाले, चाहे जंगल और वन्यजीवन के बारे में कुछ ना जाने। जाते समय कैमरे के साथ फ़ोटो बाद टाइगर की फोटो वाल में, है कोई उसे बड़ा नायक। 'सेल्फी विथ टाइगरÓ भी कुछ समय बाद पर्यटन लाबी अरेंज कर देगीं। इस ताकतवर लाबी को पैसा चाहिए। नवम्बर में जो पार्क खुलते थे, वो आधी अधूरी तैयारी से अक्टूबर में शुरू हो जाते है। किसलिए ये सब, वन्यजीवों पर क्या असर पड़ेगा ये कभी सोचा। शराबबन्दी पूरे देश में हो सकती है,पर पार्क के होटलों में कदाचित नहीं।
 अगर हुई तो इनका दिवाला निकल जायेगा। मुर्गा नहीं कटा तब भी इन बड़े आलीशान होटलों के बदरंग होने में कुछ साल लगेगें। चिंतन करें, हम वन्यजीवन का संरक्षण कर रहे हैं,या फिर होटल लॉबी का पोषण।
नेक उद्देश्य मगर कुछ अच्छा करने के बहाने से कुछ और हो रहा, पर कई का पापी पेट 'सेव टाइगरÓ पाल रहा। गन्दा है पर धंधा है, लेकिन क्या सबके लिए सब चँगा है।