चंद्रमा का दर्शन कर पति के हाथ पानी पीकर तोड़ा उपवास
रायपुर।
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी के शुभ अवसर पर प्रदेश सहित देश के अधिकांश इलाकों में सुहागिनों ने सुहाग की आयु बढ़ाने का पर्व करवाचौथ निर्जला रख किया है।
पौराणिक काल में माता पार्वती ने शिव के प्रति समर्पण भावना को प्रदर्शित करने के लिए उक्त पर्व को निर्जला रहकर किया था। पंडित विनीत शर्मा ने बताया कि एक अन्य मान्यता के अनुसार द्वापर युग में देवी द्रोपती ने पंच पंाडवों को महाभारत के युद्ध में कौरवों से विजय प्राप्त करने के लिए कठोर तप कर इस व्रत को किया था। करवाचौथ का मुख्य उद्देश्य जहां सुहागिनों द्वारा अपने पति के प्रति प्रेम का प्रदर्शन करना है। वहीं साथ-साथ खुशहाल जिंदगी जीना भी इस पर्व की मूल भावना को परिलक्षित करता है। शनिवार को करवाचौथ की तैयारियां महिलाओं द्वारा जोर शोर से की गई। शहर के अधिकांश मेहंदी पार्लरों सहित ब्यूटी पार्लर में श्रृंगार के लिए कतारबद्ध होकर महिलाओं ने अपना श्रंृगार करवाया।  

महामाया मंदिर के पुजारी पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि चतुर्थी की तिथि सूर्योंदय से पहले ब्रम्हमुहूर्त में सुबह 4 बजे से प्रारंभ हुई है। ज्यों-ज्यों शाम ढलेगी त्यों-त्यों बेसब्री से सुहागिनें चांद का दीदार चलनी में करने के लिए बैचेन हो उठेगी।  इस दौरान दिनभर पूजा पाठ सहित शाम को शिव पार्वती एवं गणेश का विधि विधान से पूजन महिलाओं द्वारा किया गया। रात को चंद्र दर्शन के उपरांत ही महिलाएं अपने पति के हाथों पानी पीकर व्रत तोड़कर परिवार के बड़े परिजनों से आशीर्वाद लिया।