आखिरकार कोयले की कमी को लेकर शिवराज ने लिखा पत्र
 भोपाल। प्रदेश के सरकारी बिजली कारखानों की स्थिति इन दिनों बिल्कुल ठीक नहीं है। सभी बिजली कारखाने कोयले की कमी से जूझ रहे हैं। जिसके कारण यह पर्याप्त बिजली नहीं बना पा रहे हैं, जिससे प्रदेश में बिजली संकट गहरा सकता है। थर्मल पावर प्लांटों में जहां कोयले को लेकर स्टॉक की स्थिति ठीक नहीं है ,वही हाइडल पावर प्लांट भी कम वर्षा के चलते नहीं चल पा रहे हैं। ऐसे में शिवराज सरकार के सामने कोयले को लेकर संकट खड़ा हो गया है। इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश को पर्याप्त कोयले की सप्लाई निरंतर जारी रखने को लेकर एक पत्र केंद्रीय कोयला मंत्री पीयूष गोयल को लिखा है। जिसमें उल्लेख किया है कि मध्यप्रदेश को कोल इंडिया की एसीसीएल और डब्ल्यूसीएल कंपनी कि कोयला खदानों से एग्रीमेंट के अनुसार कोयले की सप्लाई करना है, लेकिन पिछले कुछ माह से इन दोनों कंपनियों द्वारा कोयले की सप्लाई पर्याप्त नहीं करने के कारण पावर प्लांटों में कोल स्टॉक ना के बराबर हैं। स्थिति यह है कि पावर प्लांटों में केवल 2 से 3 दिनों का कोयला है, अगर कोयले की सप्लाई को नहीं बढ़ाया गया तो प्रदेश में बिजली संकट की गहराने के पूरे आसार है।
 वैसे भी इन दिनों बिजली की डिमांड करीब 8000 मेगावाट के आसपास प्रतिदिन है। वही सामने दीपावली का त्यौहार नजदीक आने के कारण सरकार और चिंता में है। क्योंकि इस दिन डिमांड करीब 10000 मेगावाट के पार रहती है। इस डिमांड को पूरा करने में पावर जनरेटिंग कंपनी हमेशा से ही सफल रही है, लेकिन इस बार कंपनी डिमांड को पूरा करने की स्थिति में नहीं दिख रही हैं , और तो और हाइडल पावर प्लांट से बनने वाली बिजली भी इस वर्ष ना के बराबर है जो जेनको के लिए हमेशा बूरे समय में मददगार साबित रहती आई है। 
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पावर प्लांटों में कोयले की स्थिति की पूरी जानकारी लेने के बाद ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को कोल इंडिया की कंपनियों से सतत संपर्क कर कोयले की सप्लाई बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। रविवार को मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के पावर प्लांटों में कोयले के स्टॉक की स्थिति पर नजर डालें तो श्री सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट खंडवा में  डेढ़ दिन अर्थात 18700 मीट्रिक टन , अमरकंटक ताप विद्युत ग्रह चचाई में 4 दिन 14000 मीट्रिक टन, संजय गांधी ताप विद्युत ग्रह बिरसिंहपुर में 2 दिन 36000 मीट्रिक टन तथा सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट सारणी में 2 दिन का कोयला शेष बचा है। वही करीब 15 हाइडल पावर प्लांटों में से केवल 3 ही चल रहे है। जिसमें पेंच से 100 मेगावाट ,बाणसागर की 2, 3 तथा 4 से 60 मेगावाट तथा राजघाट चंदेरी से 10 मेगावाट बिजली बन रही है। 
 
बैंस और भैरवे के लिए बड़ी चुनौती
 प्रदेश में बिजली संकट की स्थिति पैदा ना हो इसके लिए ऊर्जा विभाग ने कमर तो कस ली हैं। खासतौर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा इकबाल सिंह बैंस तथा बिजली उत्पादन कंपनी के एमडी आनंद प्रकाश भैरवे के लिए इसे एक  बड़ी चुनौती माना जा रहा है। हालांकि इस तरह की परेशानियों से निपटने में आईएएस एसीएस बैंस माहिर माने जाते हैं , तो वहीं उनका साथ दे रहे हैं बिजली उत्पादन कंपनी के प्रबंध संचालक  भैरवे । जो अपने लंबे समय के अनुभव के कारण बीच-बीच में एसीएस बैंस को कुछ ऐसी सलाह दे देते हैं जो एकदम सटीक बैठ जाती है। जिससे सांप भी मर जाता है और लाठी भी नहीं टूटती। खैर कोयले की सप्लाई बढ़ाने में इस बार यह दोनों अधिकारी किस तरह सफल होते हैं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।