कोई भी धार्मिक या शुभ कार्य करने से पहले प्रथम पूज्य श्रीगणेश जी का पूजन किया जाता है। गणपति बप्पा को शुभ अौर मंगलकारी माना जाता है। श्री गणेश के पूजन से सुख-समृद्धि की ही प्राप्ति नहीं होती बल्कि वास्तुशास्त्र में भी बप्पा की महिमा का बड़ा महत्व है। वास्तु के अनुसार घर में श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है अौर शुभता का आगमन होता है। यदि घर में बप्पा की प्रतिमा स्थापित करते समय थोड़ी सी भूल की जाए तो शुभता अशुभता में बदल जाती है।भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान-

भगवान गणेश की प्रतिमा का मुंह दक्षिण दिशा की ओर न हो, ऐसा होने से घर या दुकान पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। घर में भगवान गणेश की बैठी मुद्रा में और दुकान या ऑफिस में खड़े गणपति की प्रतिमा रखनी चाहिए।

वास्तु के अनुसार घर में श्रीगणेश जी की अधिक प्रतिमाअों को न रखें। इससे घर में अशुभता आगमन होता है

श्रीगणेश की प्रतिमा को घर में स्थापित करने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि   उनकी सूंड बाईं तरफ घुमी हो। दाईं तरफ की ओर मुड़ी हुई सूंड वाली गणपति की प्रतिमा की पूजा से मनोकामना देर से सिद्ध होती हैं।

गणपति को कभी भी तुलसी दल अर्पित नहीं करना चाहिए। भगवान गणेश ने तुलसी माता के विवाह का प्रस्ताव ठुकरा दिया था, जिसके बाद उन्होंने श्रीगणेश को दो विवाह का श्राप दिया था। जिसके बाद श्रीगणेश पर तुलसी अर्पित करना वर्जित है। 

बप्पा की प्रतिमा को घर में इस तरह से स्थापित करना चाहिए कि उनकी पीठ घर के किसी भी कक्ष की तरफ न हो। इससे घर में सदैव अशांति रहती है अौर सुख-समृद्धि का अभाव भी रहता है।

इस तरह उत्तम नियम से प्रतिमा को स्थापित करने से गणपति प्रसन्न होते हैं और घर में शुभता का आगमान होता है।