वर्ष पर चलने वाले सार्द्धशती समारोह का हनुमंतराव द्वारा शुभारंभ


भोपाल, विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एवं भारतीय दर्शन के मनीषी श्री हनुमंत राव ने आज यहां कहा कि  भगिनी निवेदिता के बारे में गुरुवर रवींद्रनाथ टेगोर ने बिलकुल सही कहा था कि वे भारत की लोकमाता हैं. आपने  आह्वान किया कि हमारे अंतस में स्थित अव्यक्त भगिनी निवेदिता के हिंदू धर्म दर्शन को जागृत करना होगा, तभी हम स्वामी विवेकानंद के दर्शन को भी समझ पाएंगे।

 श्री राव सरदार वल्लभभाई पॉलिटेक्निक स्थित सभागार में भगिनी निवेदिता सार्द्धशती के अवसर पर वर्ष पर चलने वाले विविध समारोह तथा कार्यक्रमों के शुभारंभ के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा भोपाल द्वारा भगिनी निवेदिता सार्धशती समारोह समिति के तत्वावधान में किया गया। विषय था : भगिनी निवेदिता और भारतीय दृष्टि.

इसके पूर्व आपने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। श्री राव ने अपने विद्वत्तापूर्ण संबोधन में कहा कि भगिनी निवेदिता के जन्म को आगामी 28 अक्टूबर को 150 वर्ष होने जा रहे  हैं। एक विदेशी (आयरलैंड) मार्गरेट नोबल से भारतीय निवेदिता का उनका रूपांतरण अद्भुत गाथा है। उन्होंने १८९५ में ब्रिटेन में पहली बार जब स्वामी विवेकानंद के भारतीय धर्म दर्शन पर भाषण को सुना तो अत्यंत प्रभावित हुई। उन्हें आश्चर्य हुआ कि जो देश भारत पर शासन कर रहा है, वहां का एक सन्यासी उन्हें भारतीयता से अवगत करा रहा है। उसी क्षण वे युवावस्था में ही सब छोड़ भारत आ गयीं। इसके पहले वे कट्टर ईसाई थी और ब्रिटेन के प्रति भी उनकी धारणा थी कि यह देश जो कहता है वह करता नहीं। उन्होंने ब्रिटेन में धर्म और इसकी वास्तविकता के अंतर को देखा। इसके बाद एक ब्रह्मचारी के आह्वान पर एक ब्रह्मचारिणी के रूप में अपना जीवन भारत की सेवा में अर्पित कर दिया।

श्री राव ने कहा कि निवेदिता ने भारतीय स्वाधीनता संग्राम में भाग लिया तथा क्रांतिकारियों के साथ भी कार्य किया। आपने बंगाल में अनुशीलन पार्टी में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। वह कांग्रेस की बैठक में गई और वहां उन्होंने कहा कि कांग्रेस की कार्यशैली से आजादी नहीं मिलेगी, जब तक कि सब योद्धा के रूप में कार्य नहीं करते। सबसे पहले स्वामी विवेकानंद ने उन्हें निवेदिता नाम दिया तथा रवींद्र नाथ टैगोर ने उन्हें भगिनी निवेदिता और लोकमाता नाम दिया और श्री बसु ने उन्हें अग्निकन्या कहकर पुकारा।

श्रीराव ने कहा कि यह हमारी संस्कृति और परंपरा की विशेषता है कि हम एक विदेशी महिला की सार्द्धशती मना रहे हैं जो हिंदू दर्शन की महान अध्येता थी। आज से 200 साल पहले ब्रिटेन के सांसद केनेट राइट ने अपने दल के साथ भारत भ्रमण किया। फिर लौटकर दुनिया के कई देशों में 97 भाषण दिए कि भारत में शिक्षा, धर्म, संस्कृति आदि कुछ नहीं है।यह सुनते ही विदेशी मिशनरियों का भारत में प्रवेश प्रारंभ हो गया। लेकिन इसके बाद जब पूरे ब्रिटेन और अमेरिका में  स्वामी विवेकानंद के भारतीय दर्शन पर भाषण हुए तो स्थिति एकदम बदल गई। उन्होंने दुनिया को बताया कि वास्तव में भारत क्या है?

वरिष्ठ पत्रकार एवं केंद्र के मध्य प्रांत के सहसंचालक श्री राम भुवन सिंह कुशवाह ने कहा कि जैसे गुरु थे वैसे ही शिष्या थी। भारत के प्रति भगिनी का समर्पण वास्तव में हमारे देश के लिए उपकार था। इसलिए हमारा भी कर्तव्य है कि हम इस लोक माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करें।

प्रारंभ में केंद्र के विभाग प्रमुख श्री मनोज गुप्ता ने विवेकानंद केंद्र का परिचय प्रस्तुत किया तथा गतिविधियों का पर प्रकाश डाला। श्री विवेक अहिरवार ने गीत प्रस्तुत किया एवं श्री रमेश कुमावत ने भगिनी निवेदिता की वाणी का पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन श्री राहुल जैन ने किया।