राज्य साइबर पुलिस ने नाइजीरियनों के अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. गिरोह ने स्थानीय लोगों की मदद से भोपाल में 42 लाख की हैकिंग की वारदात को अंजाम दिया. साइबर पुलिस ने तीन नाइजीरियनों समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

नाइजीरिया से संचालित हो रही गैंग के सदस्य इंडिया के साथ दूसरे देशों में हैकिंग के जरिए ऑनलाइन ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे हैं. चौंकाने वाली बात है कि नाइजीरियन बिना पासपोर्ट, वीजा के इंडिया में रह रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियों ने इन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की.

क्या है मामला

भोपाल के मंडीदीप में रहने वाले कारोबारी आनंद जैन ने 16 सितंबर को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी कंपनी मेसर्स प्रोम्प्ट इंजीनियर्स के खाते को हैक कर 42 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए निकाल लिए हैं.

साइबर पुलिस की जांच में सामने आया कि नाइजीरियन गैंग के सदस्यों ने नेट बैंकिंग में रजिस्टर्ड आनंद जैन की बीएसएनएल की सिम फर्जी दस्तावेजों के जरिए न्यू मार्केट स्थित बीएसएनएल के ऑफिस से इशू करा ली.

इसके बाद गिरोह ने आनंद जैन के इंटरनेट बैंकिंग के आईडी पासवर्ड के जरिए मोबाइल नंबर पर ओटीपी हासिल कर फर्जी तरीके से आरटीसीएस कर खाते से 42 लाख रुपए निकाल लिए.

आनंद जैन की शिकायत पर साइबर पुलिस ने बीएसएनएल ऑफिस के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो आरोपी अनिल पांडे हत्थे चढ़ गया. आरोपी अनिल शक्ति नगर हबीबगंज इलाके में रहता है.

आरोपी अनिल पेशे से वकील बताया जा रहा है. अनिल की निशानदेही पर पुलिस ने उसके साथी रामसिंह उर्फ राजवीर और शिवेंद्र सिकरवार को गिरफ्तार कर लिया. इसके अलावा पुलिस ने तीन नाईजीरियन नागरिकों को भी को भी गिरफ्तार किया.

आरोपियों की भूमिका:

आरोपी नंबर-1: अनिल पांडे, भोपाल: फरियादी की फर्जी सिम बीएसएनएल से जारी कराने के लिए आरोपी ने 35 हजार रुपए में ठेका लिया था.

आरोपी नंबर-2: रामसिंह उर्फ राजवीर, भोपाल: फर्जी सिम बनवाने और कार्ड बैंक खाते बनाने में भूमिका निभाई.

आरोपी नंबर-3: शिवेंद्र सिकरवार, भोपाल: फेक आईडी और सिम बनाने का ठेका 50 हजार रुपए में लिया.

आरोपी नंबर-4: इबेजिम पीटर चिकन्सो, नोयडा - नाइजीरिया में बैठे हैकर्स के साथ मिलकर बैंक खाते उपलब्ध कराना. नाइजीरियनों के जेल में बंद होने पर उनके संपर्क मोबाइल नंबर हासिल कर आगे बढ़ाना और मदद करना. स्थानीय नाइजीरियनों की मदद लेकर भारतीय बैंक फ्रॉड करने वालों को ढूंढना.

आरोपी नंबर-5: डेबिड ओलुटायो फेडरिक, नोयडा, नाइजीरिया में बैठे हैकर्स के साथ मिलकर बैंक खाते उपलब्ध कराना. नाइजीरियनों के जेल में बंद होने पर उनके संपर्क मोबाइल नंबर हासिल कर आगे बढ़ाना और मदद करना. स्थानीय नाइजीरियनों की मदद लेकर भारतीय बैंक फ्रॉड करने वालों को ढूंढना.

आरोपी नंबर-6: एवरेस्ट चिन्ढू ओपरके, नोयडा - नाइजीरिया में बैठे हैकर्स के साथ मिलकर बैंक खाते उपलब्ध कराना. नाइजीरियनों के जेल में बंद होने पर उनके संपर्क मोबाइल नंबर हासिल कर आगे बढ़ाना और मदद करना.

अवैध तरीके से भारत रह रहे हैं विदेशी..!

साइबर पुलिस ने नोयडा से तीनों नाइजीरियनों को गिरफ्तार किया है. नोयडा में नाइजीरियन बढ़ी संख्या में रहते हैं. पकड़े गए नाइजीरियनों में इबेजिम पीटर इंजीनियरिंग का छात्र है, जबकि बाकी के दो आरोपी अपनी पढ़ाई को पूरा कर ऑनलाइन ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे थे.

चौंकाने वाली बात है कि पकड़े गए नाइजीरियन अवैध तरीके से इंडिया में रह रहे हैं. उनका वीजा और पासपोर्ट की अवधि समाप्त हो गई है. इसके अलावा भी नोयडा में रहने वाले अधिकांश नाइजीरियनों के पास वीजा और पासपोर्ट नहीं है. ऐसे में अवैध रूप से इंडिया में रहने वाले ये नाइजीरियन देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं. पकड़े गए आरोपियों के अलावा गैंग से जुड़े राजेंद्र सतनामी और जॉन ब्राउनी फरार हैं.

ऐसे करते ठगी की वारदात...?

-नाइजीरिया में बैठकर गैंग के सरगना देशभर में ठगी करते

-स्थानीय नाइजीरियनों की मदद से फर्जी बैंक खातों को खोला जाता

-स्थानीय स्तर पर सिम के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते

-फर्जी सिम के लिए कुछ रिटेलरों से मदद ली जाती

-फर्जी सिम के लिए बकायदा शहर से बाहर के व्यक्ति को किराए से बुलाया जाता

-इंटरनेट बैंकिंग का ओटीपी पासवर्ड हैक कर आरटीजीसी के जरिए खातों में रकम ट्रांसफर करते

-नाइजीरियनों के साथ लोकल के लोग भी शामिल होते

-ठगी का बड़ा हिस्सा नाइजीरियन के पास जाता

-बाकी के शेष राशि भारत में सक्रिय दलालों को मिलता

-गिरोह के निशाने पर बड़े कारोबारी और व्यापारी रहते

मंडीदीप में हैकिंग के बाद 42 लाख रुपए की राशि देश के कई राज्यों में निकाली गई. साइबर पुलिस की अलग-अलग टीम तमिलनाडु के मदुरई, कलकत्ता, दिल्ली, मुंबई, गुजरात, यूपी, रीवा समेत दूसरे राज्यों में जांच पड़ताल कर रही है.