सरकारें बेशक राजस्व के पेच में शराबबंदी लागू करने में कदम पीछे खींच जाती हों लेकिन यहां तो शराब पीने वालों ने ही शराब पीना तो दूर छूने तक से परहेज कर लिया है. ऐसे लोगों की संख्या 2-4 नहीं बल्कि करीब 10 हजार है.

जी हां, राजस्थान के दौसा जिले के गुर्जर बाहुल्य सोलंगा धा़ड के 16 पंचायत के लोंगों ने बुधवार को ऐसा कर दिखाया है. इस खास मकसद के लिए इन पंचायतों के करीब दस हजार ग्रामीणों ने महापंचायत आयोजित की. इस महापंचायत के मुखिया रहे बाबा हरीगिरी जिन के नेतृत्व में ग्रामीणों ने ये बड़ा फैसला लिया गया कि इस क्षेत्र में न शराब पीयेंगे और न शराब बेचने के कारोबार में शामिल होंगें.

इस एतिहासिक फैसले में सभी की सहमति देखते ग्रामपंचायत खेडला बुजुर्ग और जलालपुर के सवेदकों ने ये कहते दुकान बंद कर चाबी संभला दी की वे आज से ही इस कारोबार से तौबा कर लेंगें. यदि ये ही पहल काश पूरे राजस्थान में लागू हो और शराब जैसी बुरी लत से उजड़ने वाले परिवारों को बचाया जा सके.

आयोजन में संसदीय सचिव ओमप्रकाश हुडला पूनम छाबडा पूर्व जिला प्रमुख अजीतसिंह, महेन्द्रसिंह खेडला, भगवान सिंह, टीकम सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे.