नोएडा के चर्चित आरुषि-हेमराज मर्डर केस में आरोपी दंपति राजेश और नूपुर तलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सीबीआई कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर पिटीशन पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने राजेश और नूपुर तलवार को बरी कर दिया.

गुरुवार दोपहर करीब 2ः50 बजे खचाखच भरे कोर्ट रूम में पीठ ने कहा कि संदेह के आधार पर तलवार दंपति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. उन्हें संदेह का फायदा (Benefit of Doubt) मिलना चाहिए.

तलवार दंपति के वकील तनवीर अहमद ने कहा कि उनके मुवक्किल शुक्रवार दोपहर तक रिहा हो जाएंगे. तलवार दंपति गाजियाबाद की डासना जेल में कैद है. सूत्रों के मुताबिक सीबीआई ने हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने की बात कही है.

कोर्ट ने और क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि मौजूदा सबूतों और गवाहों के आधार पर राजेश तलवार और नूपुर तलवार को आरुषि और घरेलू नौकर हेमराज की हत्या का दोषी नहीं माना जा सकता. हाईकोर्ट के जज एके मिश्रा ने कहा कि सीबीआई की जांच में कई खामियां थी. हाईकोर्ट ने कहा कि आरुषि को माता-पिता ने नहीं मारा. ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट भी इतनी कठोर सजा नहीं देता है.

सीबीआई कोर्ट ने 2013 में सुनाई थी उम्रकैद की सजा
गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने इस मर्डर मिस्ट्री में 26 नवंबर 2013 को आरुषि के माता-पिता को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इस फैसले को तलवार दंपति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.  चार साल सजा काटने के बाद दोनों बरी हो गए.

हाईकोर्ट के फैसले के बाद सीबीआई का कहना है कि हमें फैसले की कॉपी का इंतजार है. फैसला पढ़ने के बाद ही कोई प्रतिक्रिया दी जाएगी.