हिमाचल प्रदेश में नौ नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को पहली बार कई तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे. इस चुनाव में पहली बार सभी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के साथ वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रायल (वीवीपीएटी) लगाए जाएंगे, जिससे कि वोटर वोट डालने के बाद यह देख सकेंगे कि उन्होंने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है वह वोट उसी को पड़ा है.

मतदान में इस बदलाव को काफी अहम माना जा रहा है. दरअसल, दिल्ली नगर निगम और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद कई राजनीतिक दलों ने ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाया था.

सुप्रीम कोर्ट ने भी ईवीएम के साथ अनिवार्य रूप से वीवीपीएटी लगाने का आदेश दे चुका है. ऐसे में चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए यह फैसला किया है. अब माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से ईवीएम से छेड़छाड़ की संभावना खत्म हो जाएगी. मतदाता वोट डालने के बाद खुद उसकी जांच कर लेंगे.

इसके साथ ही आयोग ने वीवीपीएटी से निकलने वाली पर्ची की साइट 5.6 सीएम से बढ़ाकर 10 सीएम करने को कहा है. इससे वोटर अपने वोट डालने के बाद निकलने वाली पर्ची को ज्यादा सहज और स्पष्ट तरीके से देख सकेंगे.

आयोग ने वोटिंग कक्ष की ऊंचाई भी 30 इंच यानी करीब ढाई फीट बढ़ाने को कहा है. इससे वोटिंग की गोपनीयता को और पुख्ता बनाया जा सकेगा.

बृहस्पतिवार को चुनाव तारीकों की घोषणा करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त अचल कुमार ज्योति ने कहा कि हिमाचल चुनाव में पहली बार 136 मतदान केंद्रों का प्रबंधन पूरी तरह से महिलाएं करेंगी. इसके साथ ही मतादन केंद्रों की विडियोग्रफी भी करवाई जाएगी.

प्रदेश में चुनाव के लिए 7,521 मतदाता केंद्र बनाए जाएंगे. मतदान तारीख की घोषणा के साथ ही हिमाचल में आचार संहिता लागू हो गई है. चुनाव आयोग के अनुसार हिमाचल चुनाव में उम्मीदवार 28 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे.