मंदसौर कांड के बाद किसानों के मोर्चे पर इन दिनों बैकफुट पर चल रही शिवराज सरकार चुनाव से पहले मास्टर स्ट्रोक लगाने जा रही है. राज्य के किसानों को उनकी फसलों के उचित दाम मिले, इसके लिए प्रदेश में मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना की शुरुआत 16 अक्टूबर से होगी. लेकिन इस योजना का विपक्ष पुरजोर विरोध कर रहा है. दरअसल मध्यप्रदेश में 2018 में चुनाव हैं और प्रदेश में 72 फीसदी किसान मतदाता हैं. ऐसे में सरकार की नजर इस वोट बैंक पर है. इसलिए किसानों को खुश करने के लिए सरकार हरसंभव कदम उठा रही है.

16 अक्टूबर से शुरू होने जा रही मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है और आने वाले समय में किसानों की आत्महत्या की दर में कमी लाना है. इस योजना के तहत मिलने वाले समर्थन मूल्य और बिक्री की कीमत के बीच अंतर सीधे राज्य सरकार किसानों के बैंक खातों में जमा कराएगी. प्रदेश में 8 फसलों सोयाबीन, मूंगफली, तिल, रामतिल, मक्का, मूंग, उड़द और अरहर को इसमें शामिल किया गया है.

सरकार का कहना है इस योजना से किसान और व्यापारी दोनों फायदा होगा, क्योंकि व्यापारी अपने मूल्य पर फसल खरीदेगा और किसान को समर्थन मूल्य का डिफरेंस सरकार देगी. इसलिए किसानों को भी नुकसान नहीं होगा. इस योजना के पीछे सरकार की एक और दलील है कि योजना में उन फसलों को शामिल किया गया है जिसको खरीदकर सरकार कोई उपयोग नहीं कर सकती है. इन फसलों को ज्यादा दिनों तक स्टोरेज भी नही किया जा सकता है.

वहीं कांग्रेस ने इस योजना को छलावा बताया है. कांग्रेस के प्रभारी संगठन महामंत्री चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि सरकार ने घोटाला करने के लिए अब एक नया तरीका इजाद कर लिया है. पिछले 14 साल से बीजेपी सरकार किसानों को ठग रही है. सरकार इस योजना के जरिए भ्रष्टाचार करना चाहती है.