जबलपुर। चुनाव अगले साल की दीवाली के आसपास होंगे, लेकिन इसका असर इसी दीवाली से दिखना शुरू हो गया है। बैनर-पोस्टरों, बधाई-शुभकामनाओं के साथ ही मेल-मुलाकात और उपहार के आदान-प्रदान के माध्यम से सियारी उम्मीदें परवान चढ़ रहीं हैं। माहौल बदलने की टिमटिमा रही आस में कांग्रेसी सक्रिय हैं, तो अच्छे दिन जारी रहने की संभावना में भाजपाई उत्साह भी चरम पर दिख रहा है।

साफ दिख रहीं तैयारियां

त्योहारी गतिविधि में चुनावी तैयारियां साफ नजर आ रहीं हैं। कांग्रेसी खेमे में पश्चिम क्षेत्र में ही निश्ंिचतता है, शेष विधानसभा क्षेत्रों से टिकट के कई जुगाड़ू होर्डिंगों में दिख रहे हैं। भाजपा खेमे में चूंकि ऐसा माना जा रहा है कि मोदी-शाह की जोड़ी 40 प्रतिशत चेहरे बदलने की रणनीति में विश्वास करती है, अत: कई उम्मीदें आसमान ताकती दिख रहीं हैं। ये उम्मीद अपने समर्थकों से ‘देखते जाओ’ की बात भी कह रही हैं।

गिफ्ट भी हो गई खास

दीवाली और ‘गिफ्ट’ का पुराना नाता है। बड़े-बड़े काम इस ‘गिफ्ट’ के बदले करा लिए जाते हैं। ‘चुनावी-दीवाली’ में इस गिफ्ट का महत्व और ‘खास’ हो जाता है। चुनावी मौसम में गिफ्ट को भविष्य की निधि माना जाता है। इस बार के त्योहार में भी ‘गिफ्ट-संस्कृति’ फल फूल रही है। इस बार गिफ्ट के बदले ‘रिटर्न गिफ्ट’ का स्पष्ट प्रभाव देखा जा रहा है।

बन गई लंबी-लंबी लिस्ट

त्यौहार में सबको सेट करने की रणनीति के तहत नेताओं ने लिस्ट बना ली है। मौजूदा जनप्रतिनिधि अपनों को याद करने गिफ्ट का सहारा ले रहे हैं तो भविष्य के टिकटार्थी भी ‘गिफ्ट’ को सियासी तिकड़म का आवश्यक अंग मान रहे हैं। किस व्यक्ति का उसके क्षेत्र में कितना प्रभाव है, उसे उतनी बड़े ‘उपहार’ से नवाजने की योजनाएं बन रहीं हैं।

युवाओं में उत्साह

इस बार कांग्रेस-भाजपा दोनों खेमे में युवाओं में उत्साह देखा जा रहा है। युवा मोर्चा के नए-पुराने ताकतवर नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है। यही स्थिति कांग्रेस में है। कांगे्रसी खेमे के चुवा चेहरे सबसे ज्यादा सक्रिय हैं। सामाजिक कार्यक्रमों के साथ ही भोपाल-दिल्ली दौरे में भी युवा ब्रिगेड सक्रिय दिख रही है। देश-प्रदेश-शहर हर जगह सम्माननीयों के चरण छुए जा रहे हैं, तो  गिफ्ट का भी सहारा लिया जा रहा है।