वास्‍तुशास्‍त्र के अनुसार यदि आपका घर दक्षिण मुखी है तो बालकनी को पूर्व या दक्षिण दिशा में बनाना चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख और समृद्धि आती है।

वैसे तो आपके घर का हर कोना बेहद खास होता है, मगर बालकनी एक ऐसी जगह है जहां बैठकर आप खुद को तरोताजा महसूस करते हैं। यही वो जगह है जहां से आपके घर में सूर्य का प्रकाश प्रवेश करता है और सकारात्‍मक ऊर्जा आपके घर में प्रवेश करती है। ऐसे में बालकनी की दशा और दिशा सही होना बेहद जरूरी है।

वास्‍तुशास्‍त्र के अनुसार यदि आपका घर दक्षिण मुखी है तो बालकनी को पूर्व या दक्षिण दिशा में बनाना चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख और समृद्धि आती है।

यदि आपके घर का मुख्‍य द्वार पूर्व की ओर खुलता हो तो बालकनी भी पूर्व दिशा में ही होनी चाहिए। यदि ऐसा संभव न हो तो बालकनी को उत्‍तर दिशा में बनवा सकते हैं। वहीं जो लोग उत्तरमुखी घर बनाने के बारे में सोच रहे हैं तो उन्हें बालकनी को पूर्व या उत्तर दिशा में बनाना चाहिए।

यदि आपके घर का मुख पश्चिम दिशा की ओर हो तो आपको बालकनी उत्‍तर या पश्चिम में बनानी चाहिए। बालकनी का फर्श आपके घर के फर्श से थोड़ा नीचे होना चाहिए।बालकनी में आप विभिन्‍न प्रकार की बेल या मनी प्‍लांट लगा सकते हैं। इससे आपके घर में ठंडक रहने के साथ ही ऊर्जा भी आती है। इस बात का ध्यान रखें कि लताएं कंपाउंड की दीवार से ऊंची न चली जाएं।अक्‍सर देखा जाता है कि बालकनी का इस्‍तेमाल लोग स्‍टोर रूम की तरह करते हैं और पुरानी वस्‍तुएं और खराब पड़े सामान उसमें भर देते हैं। ऐसा करने से घर में नकारात्‍मक ऊर्जा प्रवेश करती है।