मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की मूर्ति स्थापित होने के बाद अब आरती और पूजा शुरू हो गई है. सोमवार से शुरू हुई इस पूजा में शुरुआती दौर में हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.

 

हिन्दू महासभा के मुताबिक अब गोडसे के मंदिर में हर रोज आरती होगी, जिसकी सोमवार से शुरुआत हो गई. महासभा ने गोडसे के नाम की एक आरती भी बना ली है.

 

वहीं, प्रशासन ने जो नोटिस हिंदू महासभा को दिया था, उस पर वह अब खुद घिर गया है. प्रशासन ने नोटिस में कहा था कि मंदिर का निर्माण बिना परमिशन किया गया है. साथ ही धार्मिक मंदिरों के अधिनियम के तहत अवैध है. नोटिस में 'मंदिर' शब्द के जिक्र को भुनाते हुए महासभा ने जवाब पेश किया है.

 

महासभा का कहना है कि ये मंदिर धार्मिक नहीं बल्कि राष्ट्रवादी नाथूराम गोडसे का है, जिसकी स्थापना में धार्मिक मंदिर से कोई सरोकार नहीं है.

हिंदू महसभा के पदाधिकारियों ने प्रशासन की नोटिस में खामियां बताई. एडीएम शिवराज वर्मा ने नोटिस को दोबारा भेजने की बात कही है. साथ ही एडीएम का कहना है कि उन्होंने हिंदू महासभा को जवाब देने के लिए पांच दिन का समय दिया है. इस मामले में प्रशासन कानून के तहत कार्रवाई करेगा.

 

गोडसे मंदिर बनने के छह बाद भी प्रशासन मंदिर को लेकर अपनी स्थिति साफ नहीं कर पा रहा है. जबकि मंदिर को लेकर ग्वालियर में राजनीति का पारा गर्म है. कांग्रेस गोडसे के मंदिर से मूर्ति उखाड़ने की बात कर रही है, तो वहीं महासभा गांधी की मूर्ति को शहर में तोड़ने की बयानबाजी कर रही है.

 

-9 नवंबर को हिंदू महासभा ने प्रशासन ने गोडसे के मंदिर की अनुमित मांगी.

-10 नवंबर को प्रशासन अनुमति देने से इंकार किया.

-15 नवंबर को गोडसे का मंदिर महासभा ने कार्यालय में स्थापित करके पूजा शुरू की.

-16 नवंबर को प्रशासन ने महासभा को नोटिस जारी करके 5 दिनों में मंदिर पर जवाब मांगा.