राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कानून व्यवस्था में सुधार के लिए पुलिस इनकाउंटर के बढ़ावे के आरोपों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में आयोग ने यूपी के मुख्य सचिव को 6 हफ्ते के भीतर मामले में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.

 

नोटिस में कहा गया है कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद से छह महीने के बीच यानी 5 अक्टूबर 2017 तक 433 इनकाउंटर हुए. इनमें 19 अपराधी मारे गए, जबकि 89 घायल बताए गए हैं. इसके अलावा एक अधिकारी की मौत भी इस दौरान हुई, जबकि 98 अफसर घायल हुए हैं.

 

इसके अलावा 16 सितंबर को छपी एक खबर के अनुसार नई सरकार जब से यूपी में सत्ता में आई है तब से अब तक 15 लोग इनकाउंटर में मारे जा चुके हैं. यही नहीं राज्य सरकार इसमें इनकाउंटर को उपलब्धि और कानून व्यवस्था में सुधार के सबूत के तौर पर पेश करती दिखाई गई है. खुद मुख्यमंत्री ने कहा है कि अपराधी या तो जेल जाएंगे या इनकाउंटर में मारे जाएंगे.

 

कमीशन ने पाया है कि इस साल 2017 में अब तक पुलिस की तरफ से कुल 22 मौतें इनकाउंटर में हो चुकी हैं. कमीशन का मानना है कि अगर कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद गंभीर है तो भी राज्य सरकार इस तरह की व्यवस्था नहीं दे सकती, जिसमें आरोपियों की एक्सट्रा ज्युडिशियल किलिंग हो.

 

 

मुख्यमंत्री बराबर पुलिस और राज्य द्वारा संचालित फोर्स को अपराधियों से अपनी तरह से निपटने के लिए खुली छूट देने की बात कर रहे हैं. इससे लोक सेवकों द्वारा सत्ता के दुरुपयोग की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. कमीशन ने कहा कि सभ्य समाज में डर का वातावरण होना और सरकार द्वारा इस तरह की नीतियां लागू करना, ये अच्छा नहीं है. इससे लोगों के जीने के अधिकार का हनन होता है.